नौ ग्रह और कष्ट
कैसे जानें कि किस ग्रह का अशुभ प्रभाव पड़ रहा है? जन्मपत्री के विश्लेषण द्वारा भी यह जाना जाता है कि किस ग्रह के अशुभ प्रभाव से जातक परेशान है। जन्मपत्री न होने की स्थिति में कुछ साधारण नियम लिख रहा हूँ, जिससे पता चल जाता है कि किस ग्रह की वजह से परेशानियाँ है। नवग्रहों से संबंधित परेशानियाँ और बीमारियाँ इस प्रकार हैं -
सूर्य - पिता से संबंध ठीक न होना, सरकारी नौकरी में परेशानी, सिरदर्द, नेत्र रोग, हृदय रोग, चर्म रोग, पीलिया, छय रोग, ज्वर, मस्तिष्क की दुर्बलता आदि।
चन्द्रमा - माता से संबंध ठीक न होना, मानसिक परेशानियाँ, अनिद्रा, दमा, श्वास रोग, कफ, सर्दी-जुकाम, मूत्र रोग, गर्भाशय रोग, मासिक धर्म संबधी रोग, पित्ताशय की पथरी, निमोनिया आदि।
मंगल - क्रोध अधिक आना, भाईयों से संबंध ठीक न होना, दुर्घटनाएं होना, रक्त विकार, कुष्ठ रोग, फोड़ा-फुंसी, उच्च रक्तचाप, बवासीर, चेचक, प्लेग आदि।
बुध - विद्या, बुद्धि संबंधी परेशानियाँ, वाणी दोष, मामा से संबंध ठीक न होना, स्मृति लोप, मिर्गी, गले के रोग, नाक का रोग, उन्माद,मति भ्रम, व्यवसाय में हानि, शंकालु, अस्थिर विचार आदि।
गुरु - पूजा में मन न लगना, देवतओं, गुरुओं और ब्राह्मणों पर आस्था न रहना, आय में कमी, संचित धन व्यय होना, विवाह में देरी, संतान में देरी, मूर्छा, उदर विकार, कान का रोग, गठिया, कब्ज आदि।
शुक्र - पत्नी सुख में बाधा, प्रेम में असफलता, वाहन से कष्ट, श्रृंगार के प्रति अरुचि, नपुंसकता, हरनीया, मधुमेह, मूत्र संबंधी रोग, गर्भाशय रोग आदि।
शनि - नौकरों से क्लेश, नौकरी में परेशानी, लकवा, हिचकी, वायु विकार, रीढ़ की हड्डी में तकलीफ, भूत प्रेत का भय, चेचक, कैंसर, कुष्ठ रोग, मिर्गी, नपुंसकता, पैरों में तकलीफ आदि।
राहु - दादा से परेशानी, अहंकार हो जाना, त्वचा रोग, कुष्ठ रोग, मस्तिष्क रोग, भूत प्रैत का भय आदि।
केतु - नाना से जादुई कोना से परेशानी, छूत की बीमारी, रक्त विकार, दर्द, चेचक, हैजा आदि।
उपाय क्या करें?
कुण्डली में लग्र व चंद्रमा की स्थिति से व्योक्ति के स्वभाव का अंदाजा लगाइये। उसके स्वभाव के अनुकूल ही उपाय बताइये | यदि किसी का चंद्रमा, गुरू और नवम भाव पीड़ित है और आप उसे कोई पूजा पाठ का उपाय बताते हो तो वह करेगा ही नहीं। ऐसे व्यक्ति को रत्न या तंत्र का उपाय बताएं। ग्रह कैसी राशि में है यह निर्धारित करता है कि कौन सा उपाय फल देगा। ग्रह यदि अग्नि तत्व राशि में है तो यज्ञ, व्रत आदि, ग्रह यदि पृथ्वी तत्व राशि में है तो रत्न यंत्र धातु धरण आदि, ग्रह यदि वायु तत्व राशि में है तो में जाप आदि, ग्रह यदि जल तत्व राशि में हैं तो उसकी वस्तुओं को पाती में बहाना, औषधि स्नान आदि से लाभ होगा। योग कारक ग्रह निर्बल है तो रत्न/यंत्र और धातु द्वारा उपचार करता चाहिए। अशुभ और मारक ग्रहों का उपचार पूजा पाठ, दान या ग्रह की वस्तु को बहाकर किया जाता है।
विभिन्न ग्रहों के दुष्परिणाम को कम करने के लिए कुछ उपाय-
सूर्य - पिता का सम्मान करें| विष्णु पूजा करें। गेहूं गुड़ और तांबे का दान-करें। अपना चरित्र उत्तम रखें। तांबे का सिक्का बहते हुए पानी में बहाएं। रिश्वत खोरी न करें।
चन्द्रमा - माता का सम्मान करें। शिव आराधना करें| चांदी, चांवल और दूध का दान करें। गंगा स्नान करें।
मंगल - भाई की सेवा करें | हनुमान जी की पूजा करें । मसूर की दाल बहते हुए पानी में बहाएं। शुद्ध चांदी शरीर पर धारण करें।
बुध- बहन,बुआं,मौसी से अशीर्वाद प्राप्त करें। सुराख बाला तांबे का पैसा बहते पानी में बहाएं। मां दुर्गा की पूजा करें।
बृहस्पति - गुरू और ब्राह्मणों की पूजा करें। धार्मिक पुस्तकें दान करें।
शुक्र - स्त्री का सम्मान करें। लक्ष्मी की उपासना करें। गोंदान करें।
शनि- मांस और शराब का सेवन न करें। नौंकरों को प्रसन्न रखें। भैरो की उपासना करें।
राहु - सरस्वती पूजन करें। बिजली का सामान घर में ठीक से रखें।
केतु - गणेश जी की पूजा करें। काला-सफेद कुत्ता घर में पालें। लाल किताब में प्रत्येक ग्रह के उपाय उनके भाव के हिसाब से कराये जाते हैं। जिनकी विस्तृत चर्चा यहां नहीं की जा रही है।
ग्रहों की शांति के उपाय
पाठकों , अभी तक हमनें आपको जानकारी दी कि अगर कोई ग्रह अशुभ है और उसकी वजह से आपको परेशानियों का सामना करता पड़ता है तो आप कौन सा उपाय कर सकते हैं। लेकित कई बार ये उपाय सफल नहीं होते तब क्या करें इसके लिए हमने आपको सस्ते, आध्यात्मिक, वैज्ञानिक, दान व पूजा से सम्बन्धित उपायों की जानकारी नीचे दी है।
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