Surya Dosh Se Hain Pareshan?सूर्य दोष दूर करने के सिद्ध उपाय: नौकरी, सेहत और मान-सम्मान में मिलेगी सफलता

Surya Dosh Se Hain Pareshan?सूर्य दोष दूर करने के सिद्ध उपाय: नौकरी, सेहत और मान-सम्मान में मिलेगी सफलता

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अगर आपको कुण्डली में सूर्य शुभ है या अशुभ है (Surya Dosh Se Hain Pareshan?) तो आपको निम्न प्रकार के उपाय करने चाहिए। अगर आपकी कुण्डली में सूर्य अशुभ है तो आपको सूर्य देव को प्रसन्न करने के लिए विष्णु भगवान की पूजा करनी चाहिएं, नौकरी, सेहत और मान-सम्मान में मिलेगी सफलता । इसके अलावा हरिवंश पुराण की कथा भी आप अपने घर में कर सकते हैं।

१. सूर्य का वैदिक मंत्र सक्षित्त: मंत्र संख्या 7000

                                     ऊँ घृणि सूर्याय नम:।

2. सूर्य का वैदिक मंत्र बृहद्‌

                   ऊँ आकृष्णेन रजसा वर्तमानो निवेशयत्रमृत मत्र्यं च।

                   हिरणययेन सविता रथेना देवो याति भुवनानि पश्चन्‌॥

3. सूर्य का बीज मंत्र:

                   ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः ।

4. सूर्य गायत्री मंत्र:

                    ॐ आदित्याय विद्महे भास्करायधीमहि तत्नो भानुःप्रचोदयात्‌ ।।

इन मंत्रों की कम से कम दो माला आपको रोजाना करनी चाहिएं। इन मंत्रों से सूर्य भगवान प्रसन्न होते हैं तथा अपना अशुभ प्रभाव-कम कर देते हैं। इन मंत्रों को प्रारंभ करने से पहले आपको लाल अक्षत,लाल पुष्प-व गंगाजल लेकर सूर्य को ध्यान कर के आहवान करें ।

मंत्रों का जाप रूद्राक्ष या चंदन की माला से ही करना चाहिए। पाठ करते वक्त अपने पास तांबे के पात्र में शुद्ध जल,लाल पुष्प,गंगा जल ब थोड़ा गुड़ डाल कर लाल कपड़े,नारियल व॑ आम के पत्तों से ढ़क देना चाहिए तथा सूर्य से सम्बन्धित दान देने योग्य बस्तु को संकल्प करके अपने पास रख लेना चाहिए। दान करने से भी सूर्य देव प्रसन्न होते है।

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सूर्य देव के अशुभ प्रभाव को कम करने के लिए गेहूँ, लाल चन्दन, गुड़, लाल पुष्प, लाल वस्त्र, घी, लाल वर्ण की गाय, सोना, माणिक्य, तांबे के बर्तन, नारियल, लाल फल व लाल रंग से बनी मिठाईयां दान करनी चाहिए। यह दान अगर किसी क्षत्रिय व्यक्ति को किया जाता है तो उसका तुरंत लाभ मिलता है क्योंकि सूर्य एक क्षत्रिय ग्रह होता है। इसके अलावा अगर आपकी कुण्डली में सूर्य का ज्यादा प्रकोप है तो आप इसके अशुभ प्रभाव को कम करने के लिए रविवार को पानी में मैनशिला, इलाईची, देवदारू, केशर, खस, लाल रंग का फूल, लाल रंग चंदन,कठोर का फूल एवं गंगाजल मिलाकर स्नान करने से सूर्य का अशुभ प्रभाव कम हो जाता है।

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व्रत करने से भी ग्रहकोष कम हो जाता है। क्योंकि जो वार जिस ग्रह से प्रभावित होता है उसी वार को अगर व्रत किया जाए तो उस ग्रह का प्रकोप कम हो जाता है। सूर्य का वार रविवार होता है। रविवार को अगर आप व्रत करते हैं तो सूर्य देव का प्रकोप कम हो जाता है। इसके पीछे वैज्ञानिक रहस्य होता है। अगर हम रविवार को कम खाएंगे तो हमारे शरीर में ऊर्जा कम बनेगी-जब ऊर्जा कम बनेगी तो हमारे शरीर में ग्रहों की किरणों का आदान प्रदान कम होगा जिसकी वजह से सूर्य का प्रकोप कम हो जाता है। दिन में व्रत के समय चाय, दूध व फल का सेवन कर सकते हैं। सूर्यस्त के बाद भोजन कर सकते हैं। भोजन तामसिक व तला हुआ न हो।

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अगर सूर्य आपकी जन्मकुण्डली में शुभ है तो आप हमेशा सोने की चैन धारण कर सकते हैं। इसके अलावा जेब में तांबे का टुकड़ा सत्ताईस दिन रखने से सूर्य अपना फल अच्छा देता है।

अगर आप घर में लाल रंग की गाय रखते हैं या लाल रंग का कृता पालते हैं या लाल रंग के गुलाब के पौधे अपने घर में लगाते हैं तो इससे सूर्य बलवान होकर अच्छा फल देता है।

इक्कीस रविवार तक लाल चंदन अथवा केशर का तिलक लगाने से सूर्य का शुभ फल बढ़ जाता है।

खाना खाते समय सोना या तांबे की चम्मच का इस्तेमाल किया जाय तो सूर्य का शुभ प्रभाव बढ़ जाता है तथा लगातार ग्यारह रविवार सूर्य स्नान करें। स्नान की विधि ऊपर बताई जा चुकी है।

नेक चाल चलन रखना, शराब न पीना, मांस भक्षण न करना, जल में गुड़ डाल कर पीना। इससे सूर्य प्रसन्न होकर अपना प्रभाव कम कर देते हैं।

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अगर सूर्य आपकी कुण्डली में अशुभ है तो आपको निम्न प्रकार के उपाय करने चाहिए। इन उपायों को करने से सूर्य देव अपना प्रकोप कम कर देते हैं।

तांबे के बर्तन में शुद्ध जल रखकर उसमें लाल चंदन मिलाकर सूर्य को 108 रविवार तक अर्पण करें तथा साथ में सूर्य मंत्र का जाप करें तो सूर्य अशुभ प्रभाव कम कर देता है।

बहते हुए पानी में 43 दिन तक 100 ग्राम गुड़ या तांबे के सिक्के बहाने से सूर्य का प्रकोप कम हो जाता है। इसके पीछे वैज्ञानिक रहस्य होता है कि हमारे शरीर में हाथों से नकारात्मक ऊर्जा व तांबे की सिक्कें के माध्यम से निकल कर पानी में बह जाती है।

तंबाकू, शराब, परस्त्री गमन, झूठ बोलना, मांस भक्षण इत्यादि न करने व अपने चरित्र को ठीक रखने से सूर्य देव प्रसन्न होते हैं।

रविवार को पूर्व दिशा में निर्जन स्थान में जाकर तांबे के टुकड़े पर केसर लगाकर गुलाबी वस्त्र में लपेट कर दबाने से सूर्य देव का प्रकोप कम हो जाता है। इसके पीछे भी ऊपर बतलाया गया वैज्ञानिक आधार होता है।

प्रत्येक रविवार को व्रत रखना, सूर्य यंत्र की उपासना करना, तथा रविवार को सूर्य नक्षत्र में सूर्य के मंत्रों के माध्यम से हवन कराने से सूर्य का प्रकोप कम हो जाता है।

सूर्य यंत्र कैसे धारण करें? जानें धारण करने के नियम, मंत्र और सावधानियां

जिन पाठकों को कुण्डली में सूर्य का प्रकोप है उनको अपने निवारण के लिए सोने या तांबे के पत्र पर सूर्य यंत्र खुदवा कर उसके बीच में माणिक्य को जड़वाकर अपने गले में धारण कर सकते हैं अगर ऐसा करने में आप सक्षम नहीं है तो सूर्य यंत्र को भोजपत्र पर अष्टगंध से लिखवाकर तांबे की अंगूठी या तांबे की ताबीज में डालकर आप अपने हाथ में या गले में पहन सकते हैं। इसके पहने से आपके व्यापार में घाटा, नजर लगना, काम न बनना जैसी समस्याएं दूर हो जाती हैं। इस यंत्र को मंत्रों के द्वारा शुद्ध अवश्य कर लेना चाहिए। ये 7000 मंत्र आपको अवश्य करने चाहिए। इतनी मंत्रों की संख्या करने से ये यंत्र प्राण प्रतिष्ठित हो जाता है। इसके अतिरिक्त सूर्य की शांति के लिए हमेशा रविवार को केशर का तिलक लगा सकते हैं। गरीबों, अंधविध्यालय, कुष्ठ आश्रम, अस्पतालों में गेहूं से बने हुए पकवानों का दान कर सकते हैं। सूर्य गायत्री मंत्र, आदित्य हृदय स्त्रोत, सूर्य कवच का पाठ व विष्णु भगवान की उपासना करने से सूर्य के शुभ प्रभाव प्राप्त होते हैं।

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