लग्न अनुसार रत्न का चयन: मेष से कन्या लग्न के लिए कौन सा रत्न पहनें? (संपूर्ण गाइड) 2026

लग्न अनुसार रत्न का चयन: मेष से कन्या लग्न के लिए कौन सा रत्न पहनें? (संपूर्ण गाइड) 2026
लग्न अनुसार रत्न चयन - मेष से कन्या लग्न के शुभ रत्न (Gemstone according to Lagna), Lagna Anusar Ratna Chayan Chart for Mesh to Kanya Ascendants

यहां पर पाठकों के लिए संक्षिप्त में रत्नों के चयन प्रकिया को बताया गया है जिसे जानकर व्यक्ति अपने लग्न के अनुसार रत्न का चयन कर सकता है। यह काफी सरल विधि है।

1. मेष लग्न के लिए शुभ रत्न (Aries Ascendant Gemstone) : स्वामी मंगल 

माणिक – मेष लग्न में सूर्य पंचम स्थान का स्वामी है। लग्नेश मंगल का मित्र है। माणिक धारण करने से शुभ फलों की प्राप्ति होगी। सूर्य की महादशा में लाभकारी होता है माणिक पहनना।

मोती – चन्द्र चतुर्थ भाव का स्वामी है। लग्नेश मंगल का मित्र है। मोती धारण करना शुभ है। मूंगा के साथ मोती धारण करना और भी शुभ और लाभकारी होता है। 

मूंगा – मंगल लग्नेश है। यह जातक का जीवन रत्न है। आजीवन धारण करें तो सभी प्रकार से सुखी होंगे।

पन्ना – बुध 3,6 अनिष्ट भावों का स्वामी है मंगल का मित्र नहीं है। सोच समझ कर पहनें, अन्यथा परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

पुखराज – गुरु नवम त्रिकोण और द्वादश भावों का स्वामी है। इस लग्न के लिए शुभ माना गया है। पुखराज मूंगे के साथ विशेष लाभकारी होता है, खास कर बृहस्पति की महादशा में पहनना चाहिए।

हीरा – शुक्र 2,7 भावों का स्वामी होकर प्रबल मारक ग्रह है। मंगल का मित्र भी नही है। फिर भी शुक्र स्वराशि में अथवा उच्च का हो, तो शुक्र की महादशा में धारण कर सकते हैं। पर ध्यान रखें, शुक्र का दैनिक वैदिक मंत्र जाप जरूरी है।

नीलम – शनि 10,11 भावों का स्वामी है। एकादश भाव का स्वामी होकर शनि मेष लग्न के लिए शुभ नही है। शनि यदि 1,2,4,5,9,10,11 भावों में स्थित हो, तो शनि की महादशा में लाभकारी हो सकता है। लेकिन ना पहनें तो अच्छा रहेगा।

नोट: – ऊपर मेष लग्न के लिए बताए शुभ फलदायक रत्नों को पहनने से बल, बुद्धि, ज्ञान, विद्या, धन, राजकृपा, संतानसुख की प्राप्ति भावानुसार होती है।

2. वृष लग्न के लिए शुभ रत्न (Taurus Ascendant Gemstone) : स्वामी शुक्र

माणिक – वृष लग्न में सूर्य भाव 4 का स्वामी है। परंतु सूर्य लग्नेश शुक्र का मित्र नहीं है। यदि चाहें तो सूर्य की महादशा में ही धारण करें। आवश्यक ना हो तो ना पहनें।

मोती – वृष लग्न में चंद्र 3 भाव का स्वामी है। शुभ नही है। मोती धारण नहीं करें।

मूंगा – वृष लग्न में मंगल 5,12 भावों का स्वामी है। मूंगा नहीं पहनना चहिए। मूंगा पहनना अनिष्ठकारी होगा।

पन्ना – वृष लग्न के लिए बुध 2, 5 भावों का स्वामी है। योगकारक है। पन्ना आवश्य पहनें। बुध की महादशा में विशेष लाभकारी होता है । लग्नेश शुक्र के हीरे के साथ पन्ना समृद्धि का दाता है।

पुखराज – बृहस्पति 8, 11 भावों का स्वामी होकर शुभ नही है। शुक्र और बृहस्पति में मित्रता नहीं है। यदि बृहस्पति 1,2,4,5,9 भावों में हो, तो बृहस्पति की महादशा में धन लाभ करा सकता है। अवश्यकता ना हो तो ना पहनें।

हीरा – वृष लग्न के लिए शुक्र लग्नेश है। यह जीवन रत्न है। सदा धारण करें।

नीलम – शनि 9,10 भावों का स्वामी होकर शुभ और योगकारक ग्रह माना गया है। हर प्रकार का लाभ देगा। शुक्र रत्न हीरा के साथ अति लाभदायक है।

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3. मिथुन लग्न के लिए शुभ रत्न (Gemini Ascendant Gemstone) : स्वामी बुध

माणिक – मिथुन लग्न में सूर्य 3 भाव का स्वामी है। माणिक कभी धारण नहीं करें। हानिकारक होगा।

मोती – चंद्र 2 भाव का स्वामी है। चंद्र मार्केश भी है। यदि इस लग्न में चंद्रमा 9,10,11 भावों में स्थित हो तथा दूसरे भाव स्वराशि में स्थित हो, तो चंद्र की महादशा में धारण करने से लाभ हो सकता है। आवश्यकता न हो तो न पहनें ।

मूंगा – कभी नहीं पहनें। मंगल 6, 11 भावों का स्वामी होकर शुभ फल नहीं देगा। मंगल और लग्नेश बुध मित्र भी नहीं है ।

पन्ना – बुध लग्न एवं चतुर्थ भावों का स्वामी है। पन्ना जीवन रत्न और रक्षा कवच है। सदा धारण करें।

पुखराज – वर्जित है, बृहस्पति 7,10 दो केंद्रीय भावों का स्वामी होकर केंद्रधिपति दोष से दूर हैं लेकिन मार्केश भी हैं ।

हीरा – शुक्र इस लग्न में 5, 12 भावों का स्वामी है। पंचम त्रिकोण में शुक्र की मूल त्रिकोण राशि पड़ती है। शुभ माना गया है। शुक्र और बुध में मित्रता है। शुक्र की महादशा में अति शुभ है।

नीलम – इस लग्न में शनि 8, 9 भावों का स्वामी है। नवम त्रिकोण होकर शुभ माना गया है। शनि की महादशा में लाभकारी है। पन्ना और नीलम साथ में अति शुभ है।

4. कर्क लग्न के लिए शुभ रत्न (Cancer Ascendant Gemstone) : स्वामी चंद्रमा

माणिक – 2 धन भाव का स्वामी होकर सूर्य मारक है। परंतु लग्नेश चंद्र का सूर्य मित्र है। आंखों का कष्ट हो, तो सूर्य की महादशा में माणिक धारण करें। अन्यथा न पहनें तो ठीक रहेगा।

मोती – कर्क लग्न का स्वामी चंद्रमा है। अतः मोती जीवन रत्न है। आजीवन मोती धारण करें। अति शुभ है।

मूंगा – मंगल कर्क लग्न में 5, 10 भावों का स्वामी होकर महायोग कारक और लाभकारी ग्रह है। मूंगा और मोती साथ – साथ हो, तो अत्यंत शुभ होता है। मंगल की महादशा में आवश्य पहनें।

पन्ना – बुध 3 और 12 दो अशुभ भावों का स्वामी है। कभी नहीं पहनना चाहिए।

पुखराज – कर्क लग्न के लिए गुरु 6,9 भावों का स्वामी है। नवम त्रिकोण स्वामी होकर शुभ माना गया है। मोती के साथ अधिक लाभकारी होता है।

हीरा – शुक्र 4, 11 भावों का स्वामी है। शुक्र और चंद्र में मित्रता नहीं है। अशुभ माना गया है न पहनें ।

नीलम – अशुभ है, शनि 7 और 8 स्थानों का स्वामी होकर मारक स्थान एवं दुःख स्थान का स्वामी है। कभी नीलम धारण न करें।

5. सिंह लग्न के लिए शुभ रत्न (Leo Ascendant Gemstone) : स्वामी सूर्य 

माणिक – सूर्य लग्नेश है और माणिक जीवन रत्न है। अत्यंत शुभ फलदायक होता है । अवश्य और सदा धारण करें।

मोती – चंद्रमा 12 भाव का स्वामी है। यदि चंद्रमा स्वराशि में 12वें भाव में स्थित हो, तो चंद्र की महादशा में पहन सकते हैं। आवश्यकता ना हो तो ना पहनें।

मूंगा – मंगल 4,9 भाव का स्वामी होकर अत्यंत योगकारक ग्रह है। अति शुभ है । माणिक के साथ पहनें, तो विशेष फलदायक होता है।

पन्ना – सिंह लग्न के लिए बुध 2, 11 भावों का स्वामी होकर शुभ नहीं माना गया है। केवल बुध की महादशा में धारण करने से लाभ होगा।

पुखराज – बृहस्पति 5, 8 भावों का स्वामी है । पंचम त्रिकोण का स्वामी होकर शुभ माना गया है। पुखराज लाभकारी है, माणिक के साथ विशेष लाभ देगा। बृहस्पति की महादशा में अति शुभ फल प्राप्त होते हैं।

हीरा – शुक्र 3, 10 भावों का स्वामी होकर शुभ नहीं है। शुक्र और लग्नेश सूर्य का मित्र भी नहीं है। केवल शुक्र की महादशा में पहन सकते हैं। आवश्यकता न हो तो ना पहनें।

नीलम – कभी न पहनें। शनि 6,7 भावों का स्वामी होकर मार्केश भी है।

6. कन्या लग्न के लिए शुभ रत्न (Virgo Ascendant Gemstone) : स्वामी बुध

माणिक – कभी धारण न करें। सूर्य 12 वें भाव का स्वामी है। पहनने से हानि होगी और खर्च भी बढ़ेगा।

मोती – आवश्यक न समझें, तो ना पहनें चंद्र 11वें भाव का स्वामी होकर पापी ग्रह है। चंद्र और बुध के सम्बन्ध अच्छे नहीं है। चंद्र की महादशा में पहनना चाहें, तो पहन लें।

मूंगा – मंगल 3, 8 भावों का स्वामी है। न पहनें हानि ही करेगा।

पन्ना – बुध लग्न एवं दसवें भाव का स्वामी है। जीवन रत्न है, शुभ फल कारक है। अवश्य पहनें महादशा में विशेष लाभकारी है।

पुखराज –  बृहस्पति 4, 7 भावों का स्वामी होकर 2 केंद्रों का स्वामी है। अतः केन्द्राधिपति दोष से दूषित है, प्रबल मार्केश भी है। तब भी बृहस्पती की महादशा में सुख दे सकता है। आवश्यकता ना हो तो ना पहनें।

हीरा – शुक्र कन्या लग्न के लिए 2, 9 भावों का स्वामी है। त्रिकोण अधिपति होकर अत्यंत शुभ है। पन्ने के साथ पहनना अति उत्तम है।

नीलम – शनि 5,6 भावों का स्वामी होकर अशुभ नहीं माना गया है। शनि की महादशा में नीलम धारण करके लाभ पाया जा सकता है।

नोट: इस लेख में दी गई जानकारी वैदिक ज्योतिष की पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित है। इसके परिणाम व्यक्ति-विशेष के अनुसार अलग हो सकते हैं। इसे चिकित्सकीय, कानूनी या वित्तीय सलाह का विकल्प न माना जाए।


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