Rahu in 1st House: पहले भाव में राहु का फल (Good or Bad?) | 12 लग्नों पर प्रभाव और सरल उपाय

Rahu in 1st House: पहले भाव में राहु का फल (Good or Bad?) | 12 लग्नों पर प्रभाव और सरल उपाय
Vedic astrology visual guide on Rahu in the 1st house (Lagna), highlighting personality traits, ambition, and behavior.

क्या आपकी जन्म कुंडली के प्रथम भाव यानी लग्न भाव में राहु स्थित है? अगर हाँ, तो सबसे पहले राहु के नाम से डरने की जरूरत नहीं है।

ज्योतिष में राहु को अक्सर भ्रम, महत्वाकांक्षा, असामान्य सोच, भौतिक इच्छाओं, विदेशी चीजों और अचानक होने वाले बदलावों से जोड़ा जाता है। जब यही राहु कुंडली के पहले घर में आता है, तो उसका सीधा संबंध व्यक्ति के व्यक्तित्व, सोच, आत्म-छवि, व्यवहार और जीवन को देखने के तरीके से जुड़ सकता है।

ऐसे जातक कई बार सामान्य रास्ते से अलग चलना पसंद करते हैं। उन्हें कुछ अलग करने, अपनी पहचान बनाने और जीवन में बड़ी उपलब्धि हासिल करने की इच्छा हो सकती है। लेकिन दूसरी तरफ, यही ऊर्जा कभी-कभी बेचैनी, असंतोष या यह महसूस कराने लगती है कि “अभी जो मिला है, वह काफी नहीं है।”

इसलिए प्रथम भाव में राहु को केवल अच्छा या बुरा कहना सही नहीं होगा। इसका परिणाम पूरी जन्म कुंडली और राहु की स्थिति पर निर्भर करता है।

महत्वपूर्ण: केवल राहु के प्रथम भाव में होने से किसी व्यक्ति के जीवन के बारे में अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जाना चाहिए। लग्नेश, राहु की राशि, नक्षत्र, उस पर पड़ने वाली दृष्टि, युति और दशा-अंतरदशा भी देखना आवश्यक है।

प्रथम भाव में राहु का क्या मतलब है?

जन्म कुंडली का पहला घर प्रथम भाव या लग्न भाव कहलाता है। इसे व्यक्ति के शरीर, व्यक्तित्व, स्वभाव, आत्मविश्वास, सोच और दुनिया के सामने उसकी छवि से जोड़ा जाता है।

जब राहु इस भाव में स्थित होता है, तो व्यक्ति के व्यक्तित्व में कुछ अलग तरह की विशेषताएं दिखाई दे सकती हैं।

1. अलग पहचान बनाने की इच्छा

ऐसे व्यक्ति को सामान्य जीवन से संतुष्टि मिलने में समय लग सकता है। उसके मन में यह इच्छा रह सकती है कि वह दूसरों से अलग पहचाना जाए।

वह अपने करियर, व्यवसाय, पहनावे, विचारों या जीवनशैली में कुछ नया करने की कोशिश कर सकता है।

2. महत्वाकांक्षा बढ़ सकती है

राहु को इच्छाओं और महत्वाकांक्षा से जोड़कर देखा जाता है। प्रथम भाव में इसकी स्थिति व्यक्ति को अपने लक्ष्य को लेकर काफी गंभीर बना सकती है।

कभी-कभी यह महत्वाकांक्षा सफलता की वजह बनती है और कभी इतनी बढ़ जाती है कि व्यक्ति लगातार असंतुष्ट रहने लगता है।

3. व्यक्तित्व आकर्षक हो सकता है

कई ज्योतिषीय परंपराओं में प्रथम भाव का राहु व्यक्ति की व्यक्तित्व में एक अलग तरह का आकर्षण जोड़ने वाला माना जाता है।

लोग ऐसे व्यक्ति को रहस्यमय, दिलचस्प या थोड़ा अलग समझ सकते हैं। हालांकि वास्तविक परिणाम राहु की राशि और अन्य ग्रहों की स्थिति पर निर्भर करते हैं।

4. सोच सामान्य से अलग हो सकती है

प्रथम भाव में राहु व्यक्ति को पारंपरिक सोच से हटकर सोचने की प्रवृत्ति दे सकता है। वह उन चीजों को भी आजमाना चाहता है जिन्हें दूसरे लोग जोखिम भरा या असामान्य मान सकते हैं।

इसी कारण तकनीकी, मीडिया, इंटरनेट, research(अनुसंधान), मार्केटिंग या विदेश से संबंधित क्षेत्रों की ओर रुचि बनना संभव माना जाता है।

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क्या प्रथम भाव में राहु हमेशा खराब होता है?

नहीं।

यह सबसे महत्वपूर्ण बात है।

राहु को केवल “पाप ग्रह” कहकर उसका पूरा फल समझना ठीक नहीं है। किसी ग्रह का परिणाम उसकी राशि, भाव, भावेश, नक्षत्र, युति, दृष्टि और दशा के आधार पर बदल सकता है।

उदाहरण के लिए, यदि राहु किसी व्यक्ति को नई चीजें सीखने और जोखिम लेने की क्षमता देता है, तो वही ऊर्जा व्यापार या तकनीकी में सफलता की वजह बन सकती है।

लेकिन यदि यही ऊर्जा नियंत्रण से बाहर हो जाए, तो व्यक्ति जल्दबाजी, भ्रम, गलत संगति या अनावश्यक महत्वाकांक्षा की ओर जा सकता है।

इसलिए सवाल यह नहीं होना चाहिए कि “राहु अच्छा है या बुरा?”

बेहतर सवाल है:

“मेरी पूरी कुंडली में राहु किस तरह काम कर रहा है?”


12 लग्नों में प्रथम भाव का राहु

अब जानते हैं कि अलग-अलग लग्नों में प्रथम भाव का राहु किस प्रकार का प्रभाव दे सकता है। ध्यान रखें कि ये सामान्य ज्योतिषीय व्याख्या हैं। व्यक्तिगत कुंडली में परिणाम अलग हो सकते हैं।

1. मेष लग्न में राहु

मेष लग्न का स्वामी मंगल है। मेष राशि स्वभाव से ऊर्जावान और सक्रिय मानी जाती है।

प्रथम भाव में राहु यहां व्यक्ति की महत्वाकांक्षा और आगे बढ़ने की इच्छा को काफी मजबूत कर सकता है।

ऐसा व्यक्ति जल्दी निर्णय लेने वाला, साहसी और चुनौतियों में आगे निकलने की कोशिश करने वाला हो सकता है।

संभावित सकारात्मक पक्ष:

  • नई शुरुआत करने का साहस
  • नेतृत्व की इच्छा
  • चुनौती में आगे बढ़ने की कोशिश
  • जोखिम लेने की क्षमता

संभावित चुनौती:

  • जल्दबाजी
  • गुस्सा
  • बिना पूरी जानकारी के निर्णय लेना
  • अपनी बात मनवाने की जिद

इस स्थिति में व्यक्ति के लिए धैर्य और सोच-समझकर निर्णय लेना विशेष रूप से उपयोगी हो सकता है।

2. वृषभ लग्न में राहु

वृषभ लग्न में राहु को लेकर अलग-अलग ज्योतिषीय परंपराओं में अलग मत मिलते हैं। इसलिए इसे केवल “बहुत शुभ” या “बहुत अशुभ” कहना उचित नहीं है।

यह स्थिति व्यक्ति में धन, आराम, विलासिता और भौतिक सफलता की इच्छा को बढ़ा सकती है।

ऐसा व्यक्ति अच्छी जीवन शैली, वित्तीय स्थिरता और समाज में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए काफी मेहनत कर सकता है।

संभावित सकारात्मक पक्ष:

  • व्यावहारिक दृष्टिकोण
  • वित्तीय विकास की इच्छा
  • आकर्षक व्यक्तित्व
  • भौतिक लक्ष्य पर ध्यान

चुनौती:

  • जरूरत से ज्यादा भौतिक इच्छाएं
  • खर्च या जीवन शैली को लेकर अधिकता
  • संतुष्टि की कमी
    एक छह-पैनल वाला ज्योतिषीय इन्फोग्राफिक, जिसका शीर्षक 'राहु के बारह भावों में फल' (हिंदी और अंग्रेजी में) है। यह तुला से मीन तक की सातवीं से बारहवीं लग्न राशियों के लिए राहु के प्रभावों का विवरण देता है। प्रत्येक पैनल में एक शीर्षक (जैसे, '7. तुला लग्न में राहु'), एक सांकेतिक दृश्य (जैसे तुला में विवाद, वृश्चिक में सांपों से घिरा ग्लोब, और मीन में कॉस्मिक समुद्र में चलने वाला परिवार), और विस्तृत हिंदी फल-वर्णन टेक्स्ट है। इसमें हिंदी और अंग्रेजी दोनों पाठ शामिल हैं।

3. मिथुन लग्न में राहु

मिथुन लग्न के स्वामी बुध हैं और यह राशि संचार(communication), सीखने और जानकारी से जुड़ी मानी जाती है।

प्रथम भाव का राहु यहां व्यक्ति को नई जानकारी जानने, अलग नए विचारों को जानना-समझना और संचार-संबंधित क्षेत्रों में आगे बढ़ने की इच्छा दे सकता है।

Digital marketing, media, technology, sales, communication या online business जैसे क्षेत्रों में रुचि बन सकती है।

संभावित सकारात्मक पक्ष:

  • तेज सीखने की छमता
  • बात करने में महारथ 
  • जिज्ञासा
  • तकनीकि क्षेत्रों में रुचि

चुनौती:

  • एक साथ बहुत सारे काम शुरू करना
  • ज्यादा सोचना
  • जरूरत से ज्यादा जानकारी होना
  • कभी-कभी बातों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करना

4. कर्क लग्न में राहु

कर्क लग्न के स्वामी चंद्रमा हैं। कर्क राशि भावनाओं, संवेदनशीलता और मन से जुड़ी मानी जाती है।

प्रथम भाव में राहु होने पर व्यक्ति अपने बारे में और दूसरों की राय को लेकर अधिक सोच सकता है।

कभी वह बहुत आत्मविश्वास दिखाई दे सकता है और कभी अंदर से असुरक्षित महसूस कर सकता है।

संभावित प्रभाव:

  • भावनात्मक संवेदनशीलता
  • मन बहकना 
  • मानने की इच्छा( हां में हां मिलना )
  • लोगों की राय की चिंता

ऐसे व्यक्ति के लिए मानसिक तालमेल और स्वस्थ दिनचर्या बनाए रखना मददगार हो सकता है।

5. सिंह लग्न में राहु

सिंह लग्न के स्वामी सूर्य हैं। सिंह राशि नेतृत्व और आत्म-अभिव्यक्ति(self-expression) से जुड़ी मानी जाती है।

प्रथम भाव में राहु व्यक्ति के अंदर पहचान और मानने(regration)की इच्छा बढ़ा सकता है।

ऐसा व्यक्ति चाहता है कि उसके काम को लोग notice करें। यदि यह ऊर्जा सही दिशा में जाए तो leadership और बड़े goals के लिए प्रेरणा मिल सकती है।

चुनौती: कभी-कभी घमंड, जरूरत से ज्यादा भरोसा(overconfidence) या दूसरों से लगातार अनुमोदन(approval) पाने की इच्छा बढ़ सकती है।

इस स्थिति में विनम्रता और टीम वर्क(teamwork) काफी महत्वपूर्ण हो जाते हैं।

6. कन्या लग्न में राहु

कन्या राशि को विश्लेषण(analysis), विवरण(detail) और भौतिक सोच(practical thinking) से जोड़ा जाता है।

प्रथम भाव में राहु व्यक्ति को चीजों की गहराई में जाने और छोटी-छोटी बातों को सटीकता से पहचान करने की प्रवृत्ति दे सकता है।

खोज (Research), technology, data, analysis और problem-solving जैसे कामों में रुचि बन सकती है।

संभावित चुनौती:

  • ज्यादा सोचना 
  • परिपूर्णतावाद(perfectionism)
  • छोटी बातों को लेकर चिंता
  • निर्णय लेने में बहुत अधिक analysis

7. तुला लग्न में राहु

तुला लग्न के स्वामी शुक्र हैं। यह राशि व्यावहारिक संबंध, खुबसूरती, तालमेल और सामाजिक लगाव से जुड़ी मानी जाती है।

प्रथम भाव में राहु व्यक्ति की सामाजिक छवि और व्यक्तित्व को लेकर जागरूकता बढ़ा सकता है।

ऐसा व्यक्ति फैशनेबल, आकर्षक और लोगों के बीच अपनी पहचान बनाने वाला हो सकता है।

व्यापार, जनसंपर्क, मार्केटिंग, मनोरंजन या रचनात्मक क्षेत्रों में रुचि हो सकती है।

लेकिन व्यावहारिक संबंधों में पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी है, क्योंकि राहु कभी-कभी उम्मीदों को बढ़ा सकता है।

एक छह-पैनल वाला ज्योतिषीय इन्फोग्राफिक, जिसका शीर्षक 'राहु के बारह भावों में फल' (हिंदी और अंग्रेजी में) है। यह तुला से मीन तक की सातवीं से बारहवीं लग्न राशियों के लिए राहु के प्रभावों का विवरण देता है। प्रत्येक पैनल में एक शीर्षक (जैसे, '7. तुला लग्न में राहु'), एक सांकेतिक दृश्य (जैसे तुला में विवाद, वृश्चिक में सांपों से घिरा ग्लोब, और मीन में कॉस्मिक समुद्र में चलने वाला परिवार), और विस्तृत हिंदी फल-वर्णन टेक्स्ट है। इसमें हिंदी और अंग्रेजी दोनों पाठ शामिल हैं।

8. वृश्चिक लग्न में राहु

वृश्चिक राशि को रहस्य, गहराई और बदलाव से जोड़ा जाता है।

प्रथम भाव में राहु व्यक्ति को गुप्त, गहनता(intense) और रहस्यमय व्यक्तिव दे सकता है।

ऐसा व्यक्ति हर बात को दूसरों के साथ share नहीं करता और चीजों के पीछे छिपे कारणों को समझने की कोशिश कर सकता है।

संभावित सकारात्मक पक्ष:

  • शोध-उन्मुख सोच(research mindset)
  • दृढ़ संकल्प(strong determination)
  • विपरीत परिस्थिति से सीखने की क्षमता
  • रहस्यमय विषयों में रुचि

चुनौती:

  • अत्यधिक संदेह या शक करना
  • जिद्दी होना
  • अतिवादी सोच(extreme thinking)
  • गलत संगति से नुकसान

9. धनु लग्न में राहु

धनु लग्न के स्वामी बृहस्पति हैं और यह राशि ज्ञान, दर्शन, उच्च शिक्षा और विश्वास से जुड़ी मानी जाती है।

प्रथम भाव का राहु व्यक्ति को पारंपरिक विचारों पर सवाल उठाने और अपने तरीके से चीजों को समझने की प्रेरणा दे सकता है।

विदेश, उच्च शिक्षा, तकनीकि या अलग संस्कृति के प्रति आकर्षण संभव माना जाता है।

यदि राहु और बृहस्पति के बीच विशेष संबंध बने तो कुछ परंपराओं में गुरु-चांडाल योग की चर्चा की जाती है। लेकिन इसका फल केवल योग का नाम सुनकर तय नहीं किया जा सकता; पूरी कुंडली देखना जरूरी है।

10. मकर लग्न में राहु

मकर लग्न के स्वामी शनि हैं। मकर राशि को मेहनत, अनुशासन, आजीविका(career) और लंबे समय के लक्ष्य(long-term goals) से जोड़ा जाता है।

प्रथम भाव में राहु व्यक्ति को आजीविका के प्रति बहुत से क्षेत्रों में (career-oriented) और महत्वाकांक्षी बना सकता है।

ऐसा व्यक्ति धीरे-धीरे लेकिन बड़ी पद हासिल करने का लक्ष्य रख सकता है।

कॉर्पोरेट क्षेत्र, तकनीकि, शासन–प्रशासन, व्यापार या बड़े संगठन में काम करने की इच्छा हो सकती है।

चुनौती: सफलता पाने की दौड़ में निजी जीवन और मानसिक शांति को नजरअंदाज न करना।

11. कुंभ लग्न में राहु

कुंभ राशि को अविष्कार, तकनिकी, सामाजिक और अनोखे विचार से जोड़ा जाता है।

प्रथम भाव का राहु व्यक्ति को पुराने तरीकों से अलग सोचने और नई चीजें अन्वेषण (explore) करने की इच्छा दे सकता है।

तकनीकि, इंटरनेट, खोज, विज्ञान और सामाजिक नवाचार जैसे विषयों में रुचि बन सकती है।

ऐसा व्यक्ति अपनी अलग पहचान बनाना चाहता है और कई बार समाज में चल रही सामान्य सोच को चुनौती भी देता है।

12. मीन लग्न में राहु

मीन लग्न के स्वामी बृहस्पति हैं। मीन राशि कल्पना, आध्यात्मिकता और संवेदना से जुड़ी मानी जाती है।

प्रथम भाव में राहु व्यक्ति की काल्पनिकता को बढ़ा सकता है और उसे अनोखे विचार या आध्यात्मिक विषयों की ओर आकर्षित कर सकता है।

विदेशी सम्बन्ध, रचनात्मक कार्य और online अवसर में रुचि संभव है।

लेकिन कभी-कभी काल्पनिकता और वास्तविकता के बीच अंतर समझना कठिन हो सकता है।

इसलिए भौतिक योजना और साफ लक्ष्य ऐसे व्यक्ति के लिए काफी महत्वपूर्ण हो सकते हैं।


प्रथम भाव में राहु के अशुभ प्रभाव कैसे समझें?

अगर राहु कमजोर या पीड़ित स्थिति में हो, तो कुछ लोगों में निम्न प्रकार की प्रवृत्तियां देखने को मिल सकती हैं:

  • बार-बार असमंजस की स्थिति होना
  • अपने निर्णयों पर संदेह करना
  • जरूरत से ज्यादा महत्वाकांक्षा
  • दूसरों की विचार की चिंता
  • अचानक निर्णय लेना
  • गलत लोगों से प्रभावित होना
  • अत्यधिक संदेह
  • जीवन में दिशा को लेकर असमंजस

लेकिन इन लक्षणों को देखकर यह निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए कि निश्चित रूप से राहु ही इसका कारण है।

किसी भी वास्तविक समस्या के लिए भौतिकी कारणों पर भी ध्यान देना जरूरी है।


प्रथम भाव के राहु के सरल उपाय

ज्योतिषीय मान्यताओं में राहु से जुड़े कुछ उपाय बताए जाते हैं। इन्हें आस्था और पारंपरिक उपाय के रूप में अपनाया जा सकता है, लेकिन इन्हें किसी मेडिकल, वित्तीय (financial) या पेशेवर इलाज (professional treatment) का विकल्प नहीं समझना चाहिए।

1. जरूरतमंद व्यक्ति की सहायता करें

जरूरतमंद लोगों की मदद करना और अपनी क्षमता के अनुसार दान करना कई ज्योतिषीय परंपराओं में सकारात्मक माना जाता है।

2. कुत्तों को भोजन दें

काले या चितकाबरे कुत्ते को भोजन कराने की परंपरा राहु से जुड़े उपायों में बताई जाती है।

यदि आप ऐसा करते हैं तो पशु की सुरक्षा और उचित भोजन का ध्यान रखें।

3. शिव आराधना करें

भगवान शिव की पूजा और नियमित ध्यान मन को शांत रखने में मदद कर सकता है।

आप अपनी श्रद्धा के अनुसार सोमवार को शिव पूजा या ध्यान कर सकते हैं।

प्रथम भाव में राहु के 5 सरल उपाय दर्शाती इन्फोग्राफिक — जिसमें जरूरतमंदों की मदद, कुत्तों को भोजन, शिव आराधना, "ॐ रां राहवे नमः" मंत्र जाप और अनुशासित जीवन शैली के चित्र और विवरण शामिल हैं।

4. मंत्र जाप

राहु से संबंधित एक प्रचलित मंत्र है:

“ॐ रां राहवे नमः”

मंत्र का जाप अपनी श्रद्धा और सुविधा के अनुसार करें।

5. अपने जीवन में अनुशासन रखें

यह सबसे भौतिक उपाय है।

राहु से जुड़ी बेचैनी और लगातार कुछ नया पाने की इच्छा को नियंत्रण करने के लिए:

  • सोने-जागने का समय ठीक रखें
  • बिना सोचे बड़े निर्णय न लें
  • गलत संगति से बचें
  • सोशल मीडिया का अत्यधिक इस्तेमाल कम करें
  • अपने लक्ष्य लिखकर रखें
  • नियमित meditation या शांत समय निकालें

कई बार सबसे अच्छा “उपाय” यही होता है कि व्यक्ति अपनी energy को सही दिशा में लगाना सीख जाए।


क्या प्रथम भाव का राहु विदेश जाने का योग देता है?

राहु को ज्योतिष में foreign connections, unusual environments और अलग cultures से जोड़ा जाता है। इसलिए कुछ परिस्थितियों में प्रथम भाव का राहु व्यक्ति को विदेश, विदेशी लोगों या foreign-related career की ओर आकर्षित कर सकता है।

लेकिन सिर्फ प्रथम भाव में राहु देखकर विदेश जाने का निश्चित निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

इसके लिए कुंडली में 9वें, 12वें और अन्य संबंधित भावों, उनके स्वामियों तथा दशा आदि को भी देखना चाहिए।


क्या प्रथम भाव का राहु करियर में सफलता देता है?

राहु की सबसे चर्चित विशेषताओं में से एक उसकी महत्वाकांक्षा मानी जाती है।

यदि यह महत्वाकांक्षा सही दिशा में काम करे, तो व्यक्ति कठिन प्रतियोगिता में भी आगे निकलने के लिए मेहनत कर सकता है।

तकनिकी, मीडिया, digital marketing, अनुसंधान (research), मनोरंजन, online business, विदेशी कंपनी या अपरंपरागत करियर (unconventional careers) जैसे क्षेत्रों में रुचि बन सकती है।

लेकिन सफलता केवल राहु से तय नहीं होती। 10वें भाव, 10वें भाव के स्वामी, सूर्य, शनि, दशा और पूरी कुंडली का अध्ययन आवश्यक है।


राहु की महादशा में क्या प्रभाव बढ़ सकता है?

राहु अपनी महादशा या अंतरदशा में अपने प्रभाव को अधिक स्पष्ट रूप से सामने ला सकता है। इस दौरान व्यक्ति के जीवन में महत्वाकांक्षा, कैरियर में बदलाव, नए अवसर, विदेशी संबंध या अचानक बदलाव जैसी विषय-वस्तु अधिक दिखाई दे सकती हैं।

लेकिन राहु की दशा को केवल डर की नजर से देखना सही नहीं है।

कई लोगों के लिए राहु की अवधि बड़े बदलाव, नई पहचान और कैरियर विकास का समय भी बन सकती है।

असल परिणाम राहु की कुंडली में स्थिति और उससे जुड़े अन्य ग्रहों पर निर्भर करता है।


निष्कर्ष: प्रथम भाव का राहु अच्छा है या बुरा?

प्रथम भाव में राहु को केवल शुभ या अशुभ कहना सही नहीं है।

यह स्थिति व्यक्ति को महत्वाकांक्षा(ambitious), अलग सोच वाला, आकर्षक और नई चीजों को अन्वेषण करना(explore) करने वाला बना सकती है। दूसरी तरफ, यदि राहु की ऊर्जा असंतुलित हो जाए तो असमंजस, असंतोष, बहुत ज़्यादा सोचना या गलत फैसलों जैसी समस्याएं भी देखने को मिल सकती हैं।

इसलिए राहु से डरने के बजाय उसकी ऊर्जा को समझना ज्यादा जरूरी है।

अगर आपकी कुंडली में राहु प्रथम भाव में है, तो अपनी महत्वाकांक्षा को सही दिशा दें, जल्दबाजी से बचें और किसी भी ज्योतिषीय निष्कर्ष को पूरी कुंडली के संदर्भ में ही समझें।

एक छोटी-सी बात याद रखें

राहु आपको क्या बनाता है, यह केवल उसकी पद से नहीं, बल्कि आप उसकी ऊर्जा का इस्तेमाल कैसे करते हैं, इससे भी जुड़ा है।

अगर आपको यह लेख उपयोगी लगा हो, तो इसे अपने उन दोस्तों और परिवार के सदस्यों के साथ जरूर शेयर करें जिन्हें ज्योतिष में रुचि है।

आपकी कुंडली में राहु किस भाव में है? नीचे कमेंट में बताइए। आप चाहें तो अपनी लग्न राशि और राहु की राशि भी बता सकते हैं।

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