लग्न अनुसार रत्न का चयन: तुला से मीन लग्न के लिए कौन सा रत्न पहनें? (संपूर्ण गाइड) 2026
1. तुला लग्न के लिए शुभ रत्न (Libra Ascendant Gemstone) : स्वामी शुक्र
माणिक – सूर्य 11वें भाव का स्वामी है। सूर्य और लग्नेश शुक्र शत्रु भी है। माणिक शुभ नही होगा। आवश्यक लगे तो सूर्य की महादशा में पहनें। समझदारी न पहनने मे है।
मोती – चंद्र 10वें भाव का स्वामी होकर शुभ – अशुभ मिश्रित फल देता। चंद्र और शुक्र आपस में मित्र नहीं है। महादशा में पहन सकते हैं।
मूंगा – मूंगा वर्जित है कभी ना पहनें। 2 और 7 दोनो स्थानों का स्वामी होकर मंगल मार्केश भी है।
पन्ना – बुध 9, 12 भावों का स्वामी होकर तथा द्वादश में बुध की मूल त्रिकोण राशि पड़ने के अलावा नवम त्रिकोण का स्वामी होकर शुभ माना गया है। बुध और लग्नेश शुक्र की मित्रता भीं है। जातक को चहिए पन्ने के साथ हीरा धारण करें।
पुखराज – पुखराज वर्जित है। तुला लग्न के लिए बृहस्पति 3, 6 दो अशुभ भावों का स्वामी है। न पहनने में भलाई है।
हीरा – हीरा तुला लग्न का जीवन रत्न है। शुक्र लग्न और अष्टम भाव का स्वामी है। लग्नेश होने के कारण अष्टम पति होने का दोष से मुक्त है, हीरा पहनना अत्यंत शुभ होता है।
नीलम – तुला लग्न के लिए शनि 4, 7 शुभ भावों का स्वामी होकर योगकाराक ग्रह बन जाता है। लग्नेश शुक्र और शनि मित्र भी हैं। नीलम के साथ हीरा अथवा नीलम के साथ पन्ना पहनने से शुभ फल एवं हर तरह का सुख मिलेगा।
2. वृश्चिक लग्न के लिए शुभ रत्न (Scorpio Ascendant Gemstone) : स्वामी मंगल
माणिक – सूर्य दशम भाव का स्वामी होकर अत्यंत शुभ है। लग्नेश मंगल का मित्र है। धारण करने से लाभ होगा। सूर्य की महादशा में अवश्य पहनें।
मोती – चंद्र नवम त्रिकोण का स्वामी होकर अत्यंत शुभ फलदायक होता है। लग्नेश मंगल और चंद्र के संबंध अच्छे हैं। चंद्र भाग्य भाव का स्वामी भी है, मूंगा और मोती साथ धारण करें, तो लक्ष्मी की प्राप्ति होती है।
मूंगा – मंगल लग्नेश को षष्ठेश का दोष नहीं लगता है। मूंगा जीवन रत्न है, अवश्य पहनें।
पन्ना – बुध 8, 11 दो अशुभ भावों का स्वामी होकर शुभ नहीं है। यदि बुध 1,2,4,5,9,11 भावों में बैठा हो, तो बुध की महादशा में आर्थिक लाभ देगा। आवश्यकता न हो तो न पहनें।
पुखराज – बृहस्पति 2, 5 भावों का स्वामी है। पंचम त्रिकोण का स्वामी होकर शुभ ग्रह माना गया है। लग्नेश मंगल और बृहस्पति मित्र है। पुखराज पहनना चाहिए अत्यंत शुभ है।
हीरा – वृश्चिक लग्न में शुक्र 12, 7 भावों का स्वामी होकर शुभ नहीं माना गया है। मंगल और शुक्र में मित्रता भी नहीं है। हीरा धारण नहीं करना चाहिए।
नीलम – वृश्चिक लग्न के लिए शनि 3, 4 भावों का स्वामी होकर शुभ नहीं माना गया है। यदि शनि चतुर्थ भाव का स्वामी होकर 5, 9, 10, 11 भावों में स्थित हो, तो शनि की महादशा में नीलम धारण किया जा सकता है। शनि और मंगल में कोई मेल नहीं है। आवश्यकता ना हो तो ना पहनें।
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3. धनु लग्न के लिए शुभ रत्न (Sagittarius Ascendant Gemstone) : स्वामी बृहस्पति
माणिक – धनु लग्न में सूर्य नवम त्रिकोण का स्वामी होकर अत्यंत शुभ है। माणिक धारण करना शुभ रहेगा, सूर्य की महादशा में विशेष लाभकारी होता है।
मोती – धनु लग्न में चन्द्रमा अष्टम दु:स्थान का स्वामी होकर शुभ नहीं माना गया है। मोती धारण नहीं करें।
मूंगा – मंगल इस लग्न में पंचम त्रिकोण एवं द्वादश भाव का स्वामी है। त्रिकोण का स्वामी होकर शुभ माना गया है। मूंगा पहन सकते हैं।
पन्ना – बुध 7, 10 भावों का स्वामी होकर केंद्र अधिपति दोष से दूषित है। यदि बुध 1,2,5,9,10,11 भावों में स्थित हो, तो पन्ना बुद्ध की महादशा में पहना जा सकता है। उपर्युक्त भावों में बुध न हो, तो पन्ना न पहनें।
पुखराज – धनु लग्न के लिए बृहस्पति लग्न और चतुर्थ भाव का स्वामी होकर शुभ माना गया है। जीवन रत्न है, रक्षा कवच का कार्य करेगा। भाग्य रत्न माणिक के साथ पहनने से शुभ फल प्रदान करता है। बृहस्पति की महादशा में अवश्य पहनें।
हीरा – धनु लग्न के लिए शुक्र 6, 11 भावों का स्वामी होकर शुभ ग्रह नहीं है। शुक्र लग्नेश बृहस्पति का शत्रु है। एकादश का स्वामी शुक्र 1, 2, 4, 5, 9 या 11 भावों में स्थित हो, तो शुक्र की महादशा में हीरा धारण कर लाभ पाया जा सकता है। अति आवश्यक होने पर ही पहनें।
नीलम – धनु लग्न के लिए शनि 2, 3 भावों का स्वामी है। अतः अशुभ ग्रह ही माना जायेगा। शनि लग्नेश बृहस्पति का मित्र भी नहीं है। नीलम धारण नहीं करना चाहिए।
4. मकर लग्न के लिए शुभ रत्न (Capricorn Ascendant Gemstone) : स्वामी शनि
माणिक – कभी धारण नहीं करना चाहिए। सूर्य अष्टम दु:स्थान का स्वामी है और शनि का मित्र नहीं है।
मोती – कभी धारण नहीं करें। सप्तम भाव का स्वामी हो कर मार्केश है। चंद्र शनि का शत्रु भी है।
मूंगा – मंगल भी शनि का मित्र नहीं है और मंगल 4, 11 भावों का स्वामी है। मंगल की महादशा के आलावा न पहनें, तो ठीक है। अति आवश्यक होने पर ही धारण करें।
पन्ना – बुध षष्टम एवं नवम त्रिकोण का स्वामी है। नवम त्रिकोण में बुध की मूल त्रिकोण राशि पड़ती है। बुध शनि का मित्र भी है। पन्ना सदा नीलम के साथ धारण करें, तो ज्यादा उत्तम है। बुध की महादशा में धारण करना लाभदायक है।
पुखराज – अशुभ है, धारण न करें। बृहस्पति 3 एवं 9 भावों का स्वामी है। शुभ फल नहीं देगा।
हीरा – इस लग्न के लिए हीरा शुभ और योगकारक है। शुक्र पंचम एवं दशम भाव का स्वामी है, शुक्र एवं लग्नेश मित्र भी हैं। हीरा और नीलम संयुक्त रूप से पहनें, तो अति लाभकारी है। शुक्र की महादशा में हीरा अवश्य पहनें।
नीलम – लग्नेश और धनेश शनि है। जीवन कारक रत्न है, धारण करना अति शुभ है।
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5. कुम्भ लग्न के लिए शुभ रत्न (Aquarius Ascendant Gemstone) : स्वामी शनि
माणिक – माणिक न पहनें। शुभ नही है, सूर्य कुम्भ लग्न की कुंडली में सप्तम भाव का स्वामी होकर मार्केश है और लग्नेश शनि भी शत्रु है।
मोती – षष्ठेस होकर चंद्रमा दु:स्थान का स्वामी है। चंद्र और शनि भी मित्र नहीं है। कभी न पहनें।
मूंगा – मंगल 3, 10 भावों का स्वामी है। यदि मंगल 10वें भाव में स्वराशि में स्थित हो, तो ही पहनें तो ठीक है। मंगल और शनि में मैत्री भाव भी नहीं है।
पन्ना – बुध पंचम एवं अष्टम भाव का स्वामी है। पंचम त्रिकोण स्वामी होने से शुभ माना गया है। लग्नेश शनि का बुध मित्र है। पन्ने को हीरे के साथ अथवा नीलम के साथ धारण करें, तो विशेष फल प्राप्त होगा।
पुखराज – बृहस्पति 11, 2 भावों का स्वामी होकर शुभ नहीं है। दूसरे भाव का स्वामी होकर बृहस्पति मार्केश भी हो जाता है। शनि और बृहस्पति मित्र भी नहीं है। धारण न करें।
हीरा – अति शुभ है, इस लग्न में योगकरक ग्रह शुक्र 4, 9 भावों का स्वामी होकर शनि का मित्र भी है। नीलम के साथ धारण करने से हीरा और भी ज्यादा शुभ फल देगा।
नीलम – शनि लग्नेश है। अतः नीलम जीवन रत्न है। शनि की मूल त्रिकोण राशि भी लग्न में पड़ती है। बारहवें भाव का स्वामी होने का दोष नहीं रहता है।
6. मीन लग्न के लिए शुभ रत्न (Pisces Ascendant Gemstone) : स्वामी बृहस्पति
माणिक – शुभ नहीं है। सूर्य षष्टम दु:स्थान का स्वामी है। फिर भी यह अपवाद स्वरूप सूर्य छठे भाव में स्वराशि में स्थित हो, तो सूर्य की महादशा में माणिक धारण किया जा सकता है, अन्यथा नहीं।
मोती – मीन लग्न के लिए चंद्रमा पंचम त्रिकोण का स्वामी है मोती पहनने से अति शुभ फल मिलेगा। मोती और पुखराज दोनो साथ पहनने से विशेष लाभ होगा। चंद्र की महादशा में मोती अवश्य पहनें।
मूंगा – मंगल 2, 9 भावों का स्वामी है। नवम त्रिकोण स्वामी होकर मंगल शुभ ग्रह बन जाता है। मूंगा को पुखराज के साथ अथवा मोती के साथ धारण करने से सब प्रकार के शुभ फल प्राप्त हो जाएंगे।
पन्ना – बुध 4, 7 भावों का स्वामी होकर केंद्र अधिपति दोष से पीड़ित है। मार्केश भी है। पन्ना पहनने से बचना चाहिए।
पुखराज – बृहस्पति लग्नेश एवं दशम पति है। जीवन रत्न है, अवश्य पहनें। पुखराज को मोती अथवा मूंगे के साथ पहनने से विशेष लाभ होगा।
हीरा – कभी न पहनें। शुक्र 3 और 7 भाव का स्वामी होकर अति अशुभ ग्रह है। शुक्र बृहस्पति का शत्रु भी है।
नीलम – शनि 11, 12 भावों का स्वामी होकर अति अशुभ ग्रह है। बृहस्पति और शनि परस्पर मित्र भी नहीं है। फिर भी एकादश का स्वामी होकर शनि यदि 1, 2, 4, 5, 9, 11 भावों में स्थित हो, तो शनि की महादशा में नीलम धारण किया जा सकता है। आवश्यकता ना हो तो ना पहनें।
नोट: इस लेख में दी गई जानकारी वैदिक ज्योतिष की पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित है। इसके परिणाम व्यक्ति-विशेष के अनुसार अलग हो सकते हैं। इसे चिकित्सकीय, कानूनी या वित्तीय सलाह का विकल्प न माना जाए।

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