एकाक्षी नारियल का विशिष्टि प्रयोग
एकाक्षी नारियल भी एक दुर्लभ वस्तु है। यों तो बाजार में जो सामान्य नारियल मिलते हैं और उन नारियल की जटा उतारते हैं तो नीचे से एक कठोर गोला प्राप्त होता है, जिस पर दो आंखें भी बनी होती हैं। परन्तु हजारों नारियल में एक-दो नारियल ऐसे भी पाए जाते हैं जिन पर केवल एक आंख ही बनी होती हैं, ऐसा नारियल साक्षात लक्ष्मी का स्वरूप होता है इस पर कई प्रयोग आर्थिक उन्नति के लिए सम्पन्न होते हैं। यदि मात्र इस प्रकार का मंत्रसिद्ध प्राण-प्रतिष्ठित नारियल घर में रहता है, तब भी उसके जीवन में सभी दृष्टियों से अनुकूलता एवं उन्नति प्राप्त होती रहती है। दीपावली की रात्रि को किसी थाली में चावल बिछाकर उस पर इस नारियल को रख दें और उसकी कुंकुम, अक्षत आदि से पूजा करें तथा उसके सामने अगरबत्ती व दीपक जला दें। इसके बाद नीचे लिखे मंत्र की 51 माला फेंरे तो निश्चित रूप से वह व्यक्ति आर्थिक दृष्टि से आश्चर्यजनक रूप से सफलता प्राप्त करने लग जाता है और उसके जीवन में आर्थिक दृष्टि से पूर्ण समृद्धि आने लग जाती है।
मंत्र-ॐ जूं कट्ट कनकयक्षिणी हीं यः यः हुं फट्
वास्तव में यह मंत्र अत्यन्त महत्वपूर्ण है और लगभग चार या पांच घण्टे में इस मंत्र की 51 मालाएं हो जाती हैं। इसमें कनक यक्षिणी माला का ही प्रयोग करना चाहिए। इस नारियल को अपनी तिजोरी में, दुकान में या कार्यालय तथा पूजा स्थान में स्थापित करना चाहिए। कई बार मीठे के लालच में चूहे इस प्रकार के नारियल को काट देते हैं, अत: व्यक्ति चाहे तो इस नारियल को किसी पीतल के या किसी अन्य धातु के डिब्बे में रख सकता है। जप पूर्ण हो जाने के बाद माला को नदी या तालाब में प्रवाहित कर देना चाहिए। सामान्य रूप से भी यदि कोई गृहस्थ नित्य इस नारियल के सामने कनक यक्षिणी मंत्र की एक माला फेरे तो उसके जीवन में अनुकूलता प्राप्त होती रहती है। एकाक्षी नारियल के उपरोक्त वर्णित प्रयोग अचूक व चमत्कारी हैं इस तथ्य में कोई संदेह नहीं। हाल ही में घटित एक घटना इसे हाथ कंगन को आरसी क्या वाली कहावत पर चरितार्थ करती है।
जबलपुर के श्री सक्सेना अपनी पारिवारिक कलह के कारण जहां मानसिक शांति खो बैठे थे वहीं इस कारण उनका व्यावसायिक जीवन भी अव्यवस्थित हो गया। अपनी व्यथा जब उन्होंने सजल नैनों से कहा- तब मैंने उन्हें एकाक्षी नारियल रूपी दिव्य शक्ति के बारे में बतलाया व प्रयोग करने को कहा। प्रयोग के प्रभाव से कुछ समय में ही उनकी पारिवारिक व व्यावसयिक समस्याएं जाती रहीं व वे सुख समृद्धि से अपना जीवन व्यतीत करने लगे।
अपार लक्ष्मी प्राप्ति प्रयोग एकाक्षी नारियल...
सामान्यतः नारियल के प्रत्येक फल पर रेशा जटा उतारने के बाद टहनी की ओर तीन काले बिन्दु दिखते है। मान्यता है कि इनमें से दो बिन्दु नेत्रों के प्रतीक हैं और एक मुख का। गौर से देखें तो नारियल का गोला मानवाकृत्ति से बहुत कुछ मिलता-जुलता होता है। यहां तक कोई विचित्रता नहीं, यह तो नारियल की प्राकृतिक- संरचना है ही। उसकी प्रमुख और अत्यधिक प्रभावशाली विचित्रता यह है कि किसी-किसी गोले पर तीन नहीं, केवल दो बिन्दु पाए जाते हैं। अर्थात् उस पर दो नेत्रों की जगह एक नेत्र और मुख होता है। एकाक्षी नारियल बहुत कम मात्रा में प्राप्त होता है एवं इसकी पहचान विशिष्ट सिद्धि प्राप्त व्यक्तियों को ही होती है। आध्यात्मिक साधना सिद्धि केन्द्र जोधपुर के साधुगण एवं विद्वान पंड़ित जंगलों में विचरण करते हुए एकाक्षी नारियल को प्राप्त करते हैं।
एकाक्षी नारियल के लाभ...
1. एकाक्षी नारियल अपार लक्ष्मी का प्रतीक है।
2. एकाक्षी नारियल की स्थापना से स्थायी सम्पत्ति में वृद्धि होती है। इसे नित्य
3 बार सूंघने से स्त्री गर्भ पीड़ा से मुक्ति पा लेती है एवं प्रसव प्रक्रिया सरलता से पूरी होती है।
3. जिस घर में एकाक्षी नारियल स्थापित हो वहां तांत्रिक प्रयोग सरलता से अपना असर नहीं दिखा पाता।
4. बीमार व्यक्ति के ऊपर से 11 दिन तक 7 बार वार कर यदि इस एकाक्षी नारियल को बहते जल में प्रवाहित कर दिया जाए तो नारियल के साथ-साथ उस व्यक्ति का कैसा भी रोग हो वह भी चला जाता है।
5. व्यापारिक स्थान में यदि पूजन कक्ष में स्थापित कर दिया जाए तो धन वृद्धि होती है एवं ग्राहकों की संख्या बढ़ती है।
एकाक्षी नारियल की प्रयोग विधि........
सर्वप्रथम एकाक्षी नारियल को प्राप्त कर तत्काल इसे बड़े लाल कपड़े में 3 गांठ लगाकर जहां स्थापित करना चाहें वहां स्थापित कर दें। ध्यान रहे इस नारियल को जितने कम व्यक्ति देखेंगे उतना अधिक यह नारियल फल देगा। इस नारियल की तीनों गांठे 1 वर्ष मे 3 बार ही खोल सकते हैं। निम्न पर्व पर आप एकाक्षी नारियल के ऊपर का लाल कपड़ा उतारकर कपड़ा बदल सकते है। दीपावली पर्व, महाशिवरात्रि पर्व, होली पर्व, रक्षा बंधन या किसी भी सोमवार या गुरूवार को तथा साथ ही किसी भी शुभ मुहूर्त में इस नारियल का कपड़ा बदल सकते हैं।
धन प्रदायक कमलगट्टा
लक्ष्मी की किसी भी साधना में कमलगट्टे की माला का प्रयोग सबसे उत्तम माना जाता है, कमल जो कि लक्ष्मी का आसन है, कमलगट्टा भी इसी कमल के फूल का बीज होता है, सिर्फ इसे माला का रूप दे दिया जाता है, वस्तुत: इस मंत्र का प्रयोग ऐश्वर्य प्राप्ति के लिए किया जाता है। किसी भी सोमवार के दिन से इस प्रयोग को प्रारंभ किया जा सकता है। सिद्धि हेतु सर्वप्रथम मंत्रसिद्ध प्राण-प्रतिष्ठा युक्त चैतन्य कमलगट्टों की माला लें, जिसमें 108 दाने आवश्यक हैं, यह प्रयोग के आधार पर मानी गई है। प्रयोग प्रारंभ करने से पूर्व यह निर्धारित कर लें कि प्रतिदिन अनुकूल कितने मंत्रों का जाप करें क्योंकि 7 दिनों में 10 हजार मंत्र अनिवार्य हैं, कमलगट्टे की माला को जप के एक दिन पूर्व कच्चे दूध में रखें फिर उसे स्वच्छ पानी से धोकर उस पर चंदन, हल्दी, चांवल आदि से पूजन करें। लक्ष्मीजी के चित्र के सामने रखकर स्वच्छ आसन पर पूर्वाभिमुख होकर बैठ जाइए तथा नित्य निश्चित समय पर मंत्र जाप करें तथा रोजाना जाप के पश्चात् कमलगट्टे की माला लक्ष्मीजी के चित्र को पहना दीजिए। दस हजार मंत्र पूरे हो जाने पर माला को नदी के जल में प्रवाहित कर दें तथा मूर्ति को पूजास्थल पर स्थापित कर दें।
यह प्रयोग अत्यन्त महत्वपूर्ण, श्रेष्ठ और प्रभावयुक्त है और साधक को इसका प्रभाव तुरंत ही अनुभव होता है, इस प्रयोग द्वारा जीवन में सभी दृष्टियों से अनुकूलता एवं उन्नति प्राप्त होती है।
एकाक्षी नारियल के प्रमुख एवं विशिष्ट प्रयोग
1. धन-समृद्धि और लक्ष्मी कृपा हेतु
प्रयोग: दीपावली, धनतेरस, होली या रवि-पुष्य नक्षत्र के शुभ मुहूर्त में एकाक्षी नारियल को लाल रेशमी कपड़े में लपेटकर स्थापित करें।
विधि: नारियल पर कुमकुम, अक्षत और सिंदूर चढ़ाएं। इसके बाद 'ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्री सिद्ध लक्ष्म्यै नमः' या श्री सूक्त का जप करें। पूजन के बाद इसे अपनी तिजोरी या धन रखने के स्थान पर रख दें।
प्रभाव: माना जाता है कि इससे अनचाहे खर्चों पर लगाम लगती है और धन में निरंतर वृद्धि होती है।
2. व्यापार वृद्धि और कार्यसिद्धि
प्रयोग: यदि व्यापार में रुकावट आ रही हो या घाटा हो रहा हो, तो एकाक्षी नारियल को अपने व्यवसाय स्थल (दुकान/कार्यालय) के गल्ले या पूजा स्थान में स्थापित करें।
विधि: प्रत्येक शुक्रवार को इसे धूप-दीप दिखाएं और गुलाब का फूल अर्पित करें।
प्रभाव: इससे व्यापारिक बाधाएं दूर होती हैं और नए अवसर प्राप्त होते हैं।
3. नजर दोष और नकारात्मक ऊर्जा से बचाव
प्रयोग: घर में बार-बार क्लेश, बीमारियां या नकारात्मक ऊर्जा महसूस होने पर एकाक्षी नारियल का प्रयोग सुरक्षा कवच के रूप में किया जाता है।
विधि: इसे लाल कपड़े में बांधकर घर के मुख्य द्वार के ऊपर या मंदिर में स्थापित करें।
प्रभाव: यह घर को बुरी नजर और नकारात्मक शक्तियों के प्रभाव से सुरक्षित रखता है।
4. मुकदमे या कोर्ट-कचहरी में सफलता
प्रयोग: किसी कानूनी विवाद या कोर्ट-कचहरी के मामले में सफलता पाने के लिए एकाक्षी नारियल पर चमेली का तेल और सिंदूर लगाएं।
विधि: इसे किसी शुभ दिन दक्षिणावर्त घुमाकर अपने पास या घर के पूजा स्थान में सुरक्षित रखें और अपने कार्य पर जाते समय इसके दर्शन करें।
स्थापना एवं पूजन की ध्यान देने योग्य बातें
स्वच्छता और शुद्धता: प्रयोग से पहले नारियल को गंगाजल या कच्चे दूध से स्नान कराकर साफ कपड़े से पोंछ लें।
अखंडित रूप: नारियल पूरी तरह से अखंडित (टूटा हुआ न हो) और सूखा होना चाहिए।
नियमित सम्मान: इसे स्थापित करने के बाद रोजाना या विशेष तिथियों पर (जैसे पूर्णिमा या शुक्रवार) धूप-दीप दिखाकर सम्मान देना चाहिए।

0 टिप्पणियाँ