क्यों होता है दाम्पत्य जीवन में क्लेश

 क्यों होता है दाम्पत्य जीवन में क्लेश

दाम्पत्य जीवन में गृह क्लेश और पति-पत्नी के बीच तनाव दर्शाता चित्रHusband and wife arguing in living room representing marital conflict and stress at home

गृह क्लेश आज प्रायः हर घर की समस्या बनी है। हम अपने आस-पास, रिश्ते-नातों में ऐसी बातें सुनते ही रहते हैं आज उसेके घर में लड़ाई-झगड़ा हो रहा है, कल उसके घर में हुआ था। यदि कारण ढूंढा जाए तो कोई विशेष नहीं मिलता, बस किसी न किसी छोटी-सी बात को लेकर ही ऐसे विवाद प्रार्भ होते हैं और बात बढ़ती ही जाती है। गृह क्लेश दाम्पत्य जीवन में इतनी कड़वाहट घोल देता है कि पति-पत्नी एक दूसरे का चेहरा तक देखना पसंद नहीं करते हैं। फिर इनका सारा समय एक दूसरे की कमियाँ ढूंढने में ही बीतने लगता है। बात-बात पर झगड़ना,क्रोध करना, एक दूसरे को समझने का प्रयत्न नहीं करना, एक दूसरे की बात काटना, किसी भी बात से सहमत नहीं होना जैसे इनकी आदत ही हो जाती है। गृह क्लेश के कारण जीवन नर्क के समान हो जाता है। इसकी नर्क की समाप्ति तलाक जैसे कटु निर्णय पर जाकर समाप्त होती है। तलाक होने पर सामाजिक निन्दा का निशना भी बनना पड़ता है, फिर तो शायद जीवन से उमंग का नाम ही समाप्त हो जाता है। कोई आशा भी बाकी नहीं रह जाती। इसलिए बेहतर है कि हम गृह क्लेश के विषैले पौधे को घर में जड़ें फैलाने ही न दें। इस पौधे को वृक्ष बनने से पहले ही काट डालें। अन्यथा इस गृह क्लेश रूपी वृक्ष की जड़ें हमारे स्वर्ग जैसे सुन्दर घर की नींव हिला देती हैं। अच्छे-भले घर को युद्ध का मैदान बना देती हैं। अतः हमें ऐसी सभी छोटी-मोटी बातों से बचना चाहिए। उनसे सतर्क रहना चाहिए। जिनसे गृह क्लेश रूपी पौधे को पोषण मिलता हो।

यदि पति-पत्नी एक दूसरे को समझने का प्रयत्न करें, एक दूसरे की भलाई में अपनी भलाई समझें तो विवाद जन्म ही न लें। यदि पत्नी ससुराल को अपना घर और सास-ससुर को अपना माता-पिता समझकर उनकी बातों का बुरा न माने तो बात बढ़ ही नहीं पाए। हमें अपनी बर्दाश्त की क्षमता बढ़ानी चाहिए, लेकिन प्रायः ऐसा हो नहीं पाता। छोटी-छोटी बातों पर ही भड़कना, सामने बोल देने से बातें और भी अधिक उलझ जाती हैं और झगड़े का रूप ले लेती हैं। सास-ससुर को भी बिना वजह अपनी बहू को परेशान नहीं करना चाहिए। साथ ही उसकी खुशी का भी पूरा ध्यान रखना चाहिए। आपसी समझ और त्याग की भावना पर ही परिवार की नींव टिकी होती है। यदि आप इस नींव को मजबूत रख पाए तो देर-सवेरे आपका घर ढह ही जाएगा।

दाम्पत्य जीवन में क्लेश और विवाद उत्पन्न होने के प्रमुख कारणों का सचित्र विवरणCollage depicting various reasons for marital disputes including financial issues and lack of understanding

गृह क्लेश के कारण

सुखी दाम्पत्य जीवन का जहर होता है गृह क्लेश। इसके उत्पन्न होने के एक नहीं, बहुत से कारण होते हैं।

•पति-पत्नी में आपसी समझ का अभाव

•संतान का अभाव

•आर्थिक स्थिति कमजोर होने पर

•अत्यधिक कर्ज होने पर

•पारिवारिक दुश्मनी के कारण

•संयुक्त परिवार होने के कारण

•शारीरिक कुरूपता के कारण

•अनैतिक संबंध होने के कारण

•दाम्पत्य सुख में कमी होने के कारण

दाम्पत्य जीवन को सुखमय बनाने के उपाय

यह एक गोपनीय रहस्य है कि अनेक महिलाएँ ऐसा मानती है कि हनुमान जी की मूर्ति स्त्री जाति को नहीं छूनी चाहिए। क्योंकि वे बाल ब्रह्मचारी थे। यह एक भ्रमक विषय है। सीता का श्रीराम से मिलन तो श्री हनुमान ने ही करवाया था। और सीता ने हनुमान को अपना पुत्र माना था। ऐसी स्थिति में हनुमान जी महिलाओं के लिए अछूत क्यों हो गये? ऐसे विचार रखना या सलाह देना दोनों ही संकट मोचन के सम्मान ठस पहुंचाने वाला है। मेरी ऐसी मान्यता है कि महिलाएँ अगर अपने (माह के) उन पांच दिनों को छोड़ कर बाकी दिनों में अगर हनुमान जी की पूजा आराधना करते है तो निश्चित रूप से उनका दाम्पत्य जीवन सुखी रहेगा परिवार में धन-धाय्य की वृद्धि होगी और संकटों से मुक्ति मिलेगी।

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हनुमान पूजन का विधान

इस पूजा को सोलह मंगलवार अवश्य करें। श्री हनुमान की कृपा से, पति-पत्नी के दाम्पत्य जीवन में यदि विघटन है तो इसे करने से पूर्ण लाभ होगा। प्रति मंगलवार मिट्टी की एक छोटी सुंदर, निर्दोष प्रतिमा ले लाल चंदन, पीला सिंदूर और देशी घी मिलाकर दाहिने हाथ की अनामिका से हनुमान जी की प्रतिमा पर ललाट से पूँछ तक हूँ हूँ हूँ हनुमंते नमः का जाप करते हुए तिलक लगाएँ। पुनः पूँछ से ललाट तक उपर्युक्त मंत्र का जाप करते हुए तिलक लगाएँ। इस क्रम के पश्चात् हनुमान जी का ध्यान करें - हे प्रभु जिस प्रकार आपने सीता और श्रीराम का मिलन संभव किया था, उसी प्रकार मुझे मेरे पति की प्राप्ति कराएँ। इसमें वत रखने का कोई विधान नहीं है। उपर्युक्त मंत्र प्रतिदिन स्मृतिक की माला से एक माला का जाप अवश्य करें।

अत्यंत महत्वपूर्ण प्रयोग

इस महत्वपूर्ण प्रयोग को सैकड़ों लोगों पर परीक्षण के उपरांत आपके समक्ष प्रस्तुत किया जा रहा है। यह प्रयोग मंत्र उन दमपतियों के लिए अत्यंत उपयोगी है। जो आपस में किसी अन्य कार्यों से अलग-अलग रहते हो या किसी स्त्री का पति किसी अन्य स्त्री से प्रेम करता हो या अन्य स्त्री का उसके पति से शारीरिक अथवा मानसिक संबंध हो। ऐसी स्थिति में दाम्पत्य सुख का सर्वनाश हो जाता है, यह सभी जानते हैं। आपके पति या पत्नी जिस स्त्री अथवा पुरुष में रुचि, ले रहा हो उसका नाम पहले वाले खाली स्थान में रखें तथा दूसरे खाली स्थान में अपना नाम रखें। अपने नाम के स्थान पर मेरे पास आ जाए। लिखें प्रतिदिन प्रातः 9 से 10 के बीच करें। पाँच दीपक प्रज्वलित कर लें। कम से कम 180 दिन अवश्य करें। यह प्रयोग किसी भी अवस्था में कर सकते हैं।

ॐ सत्यनाम आदेश गुरु को लॉग-लॉग मेरा भाई, इन्ही लॉग ने शक्ति चलाई, पहली लॉग रातीमाती, दूजी लॉग जोबल माती, तीजी लॉग अंग मरोड़े चौथी लॉग दोऊ कर जोड़े लॉग, जो मेरी खाए ........................ के पास से ........................ के पास आ जाए। गुरु की शक्ति मेरी भक्ति फुरो मंत्र ईश्वरी वाचा॥

यह मंत्र हमें हमारे गुरुजी से प्राप्त हुआ और गुरुजी को उनके मित्र शिवचरण वाल्मीकि से मिला था। इसका प्रयोग करके हम दोनों गुरु-शिष्य हज़ारों दुखी दमपतियों का वैवाहिक जीवन संवार चुके हैं।

पति को वशीभूत करने का तिलक लगाती स्त्री

पति को वशीभूत करने का तिलक

सफेद अपराजिता की जड़, गोरोचन में मिलाकर तिलक लगाकर पति के निकट जाने पर वह वशीभूत हो जाता है। उपर्युक्त कार्य के पूर्व निम्नलिखित मंत्र का जाप 11 माला अवश्य करें। मंत्र-

ॐ रक्तचामुण्ड़ा पीत: में वशमानय नम: ह्रीं ह्रीं ह्रीं फट्।

ॐ काममालिनी ठ:ठ:।



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