Santan Sukh Me Badhak Yog: कारण, लक्षण और ज्योतिषीय निदान (Easy Remedies)2026
शास्त्र कहता है अव्यवस्थित भोग कर्म शुभ-अशुभ कर्मों के फल को अवश्य ही भोगना पड़ता है। शुभ-अशुभ कर्म मनुष्य का जन्म जन्मान्तर तक पीछा नहीं छोड़ते। यही तत्व वेदिक परासर होरा शास्त्र के पूर्वार्धफलाध्याय में स्पष्ट किया गया है। इस अध्याय में मैत्रेय जी महर्षि पाराशर से पुष्टहीनता का कारण और उसकी निवृत्ति का उपाय जानना चाहते हैं। मैत्रेय जी कहते हैं - संतानहीन व्यक्ति को सन्तान नहीं मिलती, ऐसे शास्त्रों में कहा गया है। अतः कृपया कहें कि संतानहीनता किस पाप के कारण होती है। जन्म कुण्डली से उस पहले किए गए पाप आदि का ज्ञान कैसे होगा तथा बाधा जानकर उसकी शांति कैसे होगी? पाराशर मुनि बोले - हे मैत्रेय! तुमने बहुत ही उत्तम प्रश्न पूछा है। पहले पार्वती जी के पूछने पर भगवान शंकर ने जो कहा था, वही मैं यथावत तुम्हें कहता हूं। पार्वती जी ने पूछा- प्रभो! किस पाप या किस योग में संतान हानि होती है? संतान रक्षा के लिए कृपया उपाय भी कहें? शंकर जी बोले देवी मैं तुम्हें संतान हानि के योग-दुर्योग सहित उसके फल से बचने का उपाय कहता हूं।
संतान हानि योग
गुरु,लग्नेश,सप्तमेश,पंचमेश ये सारे ही बलहीन हों तो संतान नहीं होती है। सूर्य, मंगल, राहु और शनि यदि बलवान होकर पुत्र भाव में अर्थात पंचम भाव में गए हों तो संतान हानि करते हैं। यदि ये ग्रह निर्बल होकर पंचमस्थ हों तो संतानदायक होते हैं।
शाप का ज्ञान
सर्प शाप से संतान सुख का अभाव अर्थात पूर्व जन्म या इस जन्म में जाने अनजाने की गई सर्प हत्या जनित दोष से संतान हानि होती है।
सर्पशाप शांति विधान
सर्प श्राप की निवृत्ति के लिए नागपूजा अपनी कुल परंपरा अनुसार करें। नागराज की मूर्ति को प्रतिष्ठा करें अथवा नागराज की सोने की मूर्ति बनवकर प्रतिदिन पूजा करें। तत्पश्चात् गोदान, भूमिदान, तिलदान, स्वर्णदान अपनी सामर्थ्य के अनुसार करें। तब नागराज की प्रसन्नता से वंश चल पड़ता है।
पितृशाप से संतान हानि
पंचम में सूर्य तुला राशि में अथवा मकर या कुंभ नवांश में हो तथा पंचम भाव के दोनों ओर पाप ग्रह हों। पंचम में सिंह राशि हो, पांचवें या नौवें भाव में सूर्य व पाप ग्रह हों तथा सूर्य पाप दृष्टि या पाप मध्य में हो।
पितृशाप शांति के उपाय
पितृदोष निवारण हेतु श्राद्ध करें इस विधान में असमर्थ हो तो कन्यादान करें व गोदान करें। इस तरह विधानपूर्वक शांति करने से पितृशाप से मुक्ति होती है तथा पुत्र-पौत्रादि से वंश की वृद्धि होती है।
प्रेतादिश्राप से संतानहानि
पितृकार्य श्राद्ध, तर्पण आदि न करने से पितर प्रेत रूप को प्राप्त हो जाते हैं। तब उनके शाप से वंश नहीं चलता। जन्मलग्न में इन योगों को देखकर बताया जा सकता है।
प्रेतशाप के उपाय
इस दोष की शांति के लिए गया में श्राद्ध, तथा रूद्रभिषेक करें अथवा ब्रह्माजी की स्वर्णमयी, मूर्ति, चांदी के बर्तन और नीलम का दान तथा गोदान करें और ब्राह्मणों को भोजन कराकर दक्षिणा दें। ऐसा करने से शाप से मुक्ति होती है तथा पुत्रोत्पत्ति एवं वंश वृद्धि होती है।
ग्रह बाधा शांति
यदि संतान सुख में बुध और शुक्र बाधक हों तो शिवपूजन करें। गुरु चंद्रगुप्त दोष हो तो मंत्र, यंत्र और औषधिय प्रयोग करें। राहु बाधक हो तो कन्यादान करें। सूर्य का दोष हो तो विष्णु जी का जप या हरिवंश पुराण का श्रवण करें। सामान्यतः अच्छी संतान प्राप्त करने के लिए और सब दोषों को दूर करने के लिए हरिवंश पुराण का भक्ति पूर्वक श्रवण करना चाहिए।
गर्भाधान सम्बन्धी कुछ आज़माये हुए टोटके
कभी-कभी सब कुछ ठीक होने पर भी संतान सुख कुछ लोगों को नहीं मिल पाता। सारे इलाज बेकार हो जाते हैं। यदि पुरुष और स्त्री में कोई कमी न हो परंतु फिर भी बच्चा न हो पा रहा हो या स्त्री गर्भाधान करने में असमर्थ हो रहती हो तो निम्नलिखित आज़माए हुए टोटके बड़े कारगर सिद्ध होते हैं।
👉राजोधर्म(Date) निवृति के पश्चात काली अपराजिता की जड़ को बड़े वाले नवीन गाय के दूध में तीन दिन लगातार पीने से बांझ स्त्री गर्भावती हो सकती है।
👉यदि नींबू के पुराने पेड़ की जड़ को दूध में पीस कर घी मिलाकर पीने के बाद स्त्री पति प्रसंग करे तो अवश्य ही वह एक दीर्घजीवी पुत्र की माता होने का सौभाग्य प्राप्त करेगी।
👉दक्षिणावर्ती शंख में जल भरकर या दूध भरकर पीने से संतान सुख प्राप्त होता है।
सुत सनेह बस माता बालचरित कर गान॥
इस मंत्र का सोमवार को पुत्रजीवक माला लेकर 10000 बार प्रतिदिन जप करें। इस मंत्र के प्रयोग से निश्चित ही गर्भ की स्थापना होती है ऐसा शास्त्र कहता है।
श्रेष्ठ संतान प्राप्ति के ज्योतियी निर्देश-
✳️दिन में रतिक्रिया न करें।
✳️एकादशी, पूर्णिमा, अमावस्या के दिन रतिक्रिया न करें।
✳️जिस तिथि को माता पिता का देहांत हुआ हो उस तिथि में भी रतिक्रिया न करें।
✳️अपने जन्म नक्षत्र के दिन रतिक्रिया न करें।
✳️जिस दिन नगर या ग्राम में कोई शोक हुआ हो उस दिन रतिक्रिया न करें।
उक्त अवधि के रतिक्रिया से उत्पन्न संतान कुल का नाश करने वाला, क्रूर, दुराचारी और अपराधी होते हैं।
नोट: इस लेख में दी गई जानकारी वैदिक ज्योतिष की पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित है। इसके परिणाम व्यक्ति-विशेष के अनुसार अलग हो सकते हैं। इसे चिकित्सकीय, कानूनी या वित्तीय सलाह का विकल्प न माना जाए।

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