9 Grah Aur Unke Ratna: किस ग्रह का कौन सा रत्न है? (Complete Gemstone Guide)

9 Grah Aur Unke Ratna: किस ग्रह का कौन सा रत्न है? (Complete Gemstone Guide)


रत्नों का चुनाव सावधानी से करना चाहिए। रत्न केवल शोभा बढ़ाने का साधन नही है वरन् उनमे अलौकिक शक्ति का समावेश है | उनमें मानव जीवन को सुखमय, निरोग व उल्लासपूर्ण बनाने की अप्रतिम क्षमता है। कुछ व्यक्ति नाम राशि के अनुसार रत्न धारण करना चाहते हैं जो कि गलत है। जन्मकुण्डली के पूर्ण विश्लेषण के बाद ही रत्न धारण करना चाहिए। आम धारणा यह है कि कुण्डली में त्रिकोण सदैव शुभ होता है। अर्थात लग्नेश, पंचमेश व नवमेश का रत्न धारण कर सकते हैं। लेकिन तीनों रत्न धारण करने की आवश्यकता नहीं है। इन रत्नों में से यदि कोई ग्रह अपनी उच्च राशि या स्वराशि में है तो रत्न धारण करने की आवश्यकता नहीं रह जाती क्योंकि वह पहले से ही बलवान है। ग्रहों के बल को बढ़ाने के लिए रत्न धारण किए जाते हैं। शुभ ग्रह यदि अस्त है या निर्बल है तो उसका रत्न धारण करें। ताकि उस ग्रह के प्रभाव को बढ़ाकर शुभ फलों में बढ़ोतरी की जा सके | यदि किसी का लग्न कमजोर है या लग्नेश अस्त है तो लग्नेश का रत्न धारण करें ताकि व्यक्ति स्वस्थ रहे। यदि पंचमेश निर्बल है तो उसका रत्न धारण करें। यदि भाग्येश निर्बल है या अस्त है तो भाग्येश का रत्न धारण करें। अपने भाग्य को जागृत करें। लग्नेश का रत्न जीवन रत्न, पंचमेश का कारक रत्न तथा नवमेश का भाग्य रत्न कहलाता है। त्रिकोण का स्वामी यदि नीच है तो उसका रत्न धारण न करें। द्वादश भावों के स्वामियों का रत्न कभी धारण नहीं करना चाहिए। रत्नों का प्रयोग कई रोगों को दूर करने में भी सहायक होता है। कभी भी मारक, बाधक, नीच, वक्री या अशुभ ग्रह का रत्न धारण न करें। किस रत्न के साथ कौन सा रत्न धारण करना निषेध है इस बात का भी ध्यान रखें। रत्न के वजन का निर्धारण व्यक्ति की आयु वजन व ग्रह स्थिति को देख कर करें। रत्न कितने वजन का होना चाहिए? जिस रत्न को धारण करने की सलाह दी जाती है, वह कितने वजन का हो ? ज्योतिष की अनेक पुस्तकों को छानने के बाद भी मुझे ऐसी कोई ठोस विधी हाथ नहीं लगी, जो सर्वमान्य हो। फिर भी जो ज्ञात है, उसे इस प्रकार देखा जा सकता है।

जातक के भार के अनुसार

आम तौर पर रतन का वजन कम से कम 3 रत्ती का तो होना ही चाहिए। फिर भी समान्यत: जातक के वजन के अनुसार पहनाने पर अधिकांश विद्वानों की सहमति है, अर्थात 10 किलो पर 1 रत्ती, यानी जातक 60 किलो का है, तो 6 रत्ती का रत्न पहनना चाहिए।

जातक की उम्र के अनुसार 

बच्चों को कम वजन के रत्न बतलाये जाते हैं। पुरुषों के वयस्क होने पर अधिक वजन के रत्न बतलाये जाते हैं।
An educational reference chart titled '9 Grah Aur Unke Ratna' in Hindi and English, providing a complete guide to Vedic astrology gemstones. The infographic displays a 3x3 grid matching the nine planets with their corresponding precious stones: Sun (Surya) with Ruby (Manik), Moon (Chandra) with Pearl (Moti), Mars (Mangal) with Red Coral (Moonga), Mercury (Budh) with Emerald (Panna), Jupiter (Guru) with Yellow Sapphire (Pukhraj), Venus (Shukra) with Diamond (Heera), Saturn (Shani) with Blue Sapphire (Neelam), North Node (Rahu) with Hessonite (Gomed), and South Node (Ketu) with Cat's Eye (Lehsuniya). The chart is framed in gold with a cosmic, starry background.


12 लग्न के अनुसार शुभ व अशुभ ग्रह की पूरी सूची | Ascendant Astrology Guide



लग्न                    शुभ ग्रह                                अशुभ ग्रह 

मेष                      मंगल, सूर्य, गुरू, चन्द्र              बुध, शुक्र, शनि

वृष                      शुक्र, बुध, सूर्य, शनि                 मंगल, गुरु, चन्द्र 

मिथुन                   बुध, शुक्र, शनि                       मंगल, सूर्य, गुरू, चन्द्र

कर्क                     चन्द्र, मंगल, गुरु                      बुध, शुक्र, शनि, सूर्य 

सिंह                     सूर्य, मंगल, गुरु                       बुध, शुक्र, शनि, चन्द्र 

कन्या                    बुध, शनि, शुक्र                       मंगल, सूर्य, गुरू, चन्द्र

तुला                     शुक्र, शनि,बुध                         मंगल, सूर्य, गुरू, चन्द्र

वृश्चिक                  मंगल, सूर्य, चन्द्र, गुरु                बुध, शुक्र, शनि

धनु                      गुरू, सूर्य, मंगल                       बुध, शुक्र, शनि, चन्द्र 

मकर                    शनि, बुध, शुक्र                       मंगल, सूर्य, गुरू, चन्द्र   

कुम्भ                    शनि, शुक्र, बुध                       मंगल, सूर्य, गुरू, चन्द्र

मीन                     गुरू, मंगल, चन्द्र                     बुध, शुक्र, शनि, सूर्य 

रत्न की आयु और साथ में निषेध रत्न


स्तन                         आयु                 साथ में निषेध रत्न
माणिक्य                   4 वर्ष                हीरा,नीलम,गोमेद
मोती                        3 वर्ष                गोमेद,लहसुनिया
मूंगा                         3 वर्ष                हीरा,नीलम,गोमेद
पन्ना                         4 वर्ष                मोती
पुखराज                    4 वर्ष                हीरा,नीलम
हीरा                         7 वर्ष                माणिक्य,मूंगा,पुखराज
नीलम                       5 वर्ष                माणिक्य,मृंगा,पुखराज
गोमेद                       3 वर्ष                 माणिक्य,मोती,मृंगा
लहसुनिया                 3 वर्ष                 मोती


A detailed astrological infographic in Hindi titled 'नवरत्न धारण विधि' (Navratna wearing method), outlining four steps to properly wear a Navratna ring for benefits. It describes: 1. शुद्धिकरण (Purification) using cow's milk and Ganga water. 2. शुभ मुहूर्त (Auspicious Time) and Nakshatra selection. 3. नवग्रह पूजा (Navgraha Puja) ritual. 4. धारण (Wearing) on the right hand's ring finger. The central image is a hand wearing a glowing, gem-encrusted ring with cosmic background elements.

नवरत्न धारण विधि


जब कोई व्यक्ति बहुत सी परेशानियों या बीमारियों से ग्रसित होता है तो उसे नवग्रह के नवरत्न धारण करने के लिए कहा जाता है नौ रत्न जड़ी अंगुठी में सब प्रकार के रत्नों का वजन एक जैसा रखा जाता है यह नौ रत्न सोने या चांदी की अंगुठी में जड़वा कर यथाविधि जन करवा कर शुभ मुहूर्त में अनामिका उंगली में धारण करनी चाहिए। नवरत्न का लाकेट भी बनवाया जा सकता है। इसमें रत्नों की स्थिति
नवग्रह यंत्र की तरह ही रखी जाती है-

पन्ना              हीरा                मोती

बुध                शुक्र                चंद्रमा

पुखराज        माणिक्य          मूंगा

बृहस्पति         सूर्य                 मंगल

लहसुनिया     नीलम             गोमेद

केतु               शनि                राहु








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