Shani Dev Ke Upay: शनि के दुष्प्रभाव से बचने के 7 सबसे असरदार उपाय
अगर आपकी कुण्डली में शनि ग्रह शुभ या अशुभ स्थान पर है तो आपको भिन्न-भिन्न प्रकार के उपाय करने चाहिए। अगर आपकी कुण्डली में शनि अशुभ है तो आपको शनि ग्रह को प्रसन्न करने के लिए भैरव देवता की पूजा करनी चाहिए। इसके अलावा शनि के मंत्रों का जाप आप कर सकते हैं। शनि नीच व पापी ग्रह है। इसलिए शनि से सम्बन्धित दान किसी बूढ़े व निर्धन व्यक्ति को देना चाहिए।
शनि का वैदिक मंत्र संक्षिप्त: जप संख्या 23,000
ॐ शं शनैश्चराय नमः।
शनि का वैदिक मंत्र बृहद्
ॐ शन्नो देवी रभिष्टय आपो भवन्तु पीतये ।
शंयो रभिस्त्रववन्तु नं: शनेश्चराय नमः ।।
शनि का बीज मंत्र:
ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः ।
शनि का पौराणिक मंत्र
हृम नीलाजन समाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम् ।
छाया मार्तण्ड सम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम् ॥
इन मंत्रों के जाप करने से भैरव जी प्रसन्न होते हैं। तथा जन्म कुण्डली में शनि अगर आपके लिए हानिकारक है तो इन मंत्रों का जाप कर सकते हैं। इन मंत्रों का जाप आपको शुक्ल पक्ष में शनि की होरा में शुरू करना चाहिए। ये मंत्र रुद्राक्ष, तुलसी या चन्दन की माला से करें तो श्रेष्ठ रहता है। मंत्रों के जाप के समय स्टील या लोहे का लोटा लेकर काले कंबल या लकड़ी या कुशा के आसन पर बैठकर इन मंत्रों की शुरुआत करनी चाहिए। मंत्र पूरे होने के पश्चात आपको दान करना चाहिए। दान देने योग्य वस्तुएं पूजा स्थान पर रखें।
शनि का दान (Shani Ka Daan): शनि देव को प्रसन्न करने के लिए क्या दान करें? | Saturday Remedies
शनि ग्रह जन्म कुण्डली में काले रंग का कारक होता है। शरीर में काला रंग अशुभ है या ज्यादा बलवान है तो इसके दुष्प्रभाव काले रंग के बढ़ने से या कम होने से हो सकते हैं। इसलिए काले रंग को शरीर में संतुलित करने के लिए हमें दान करना चाहिए। दान में काले कपड़े, काली गाय, उड़द, दवाइयां, काली भैंस, सरसों का तेल, नारियल, नीले फूल, तिल, उड़द, मसूर की दाल, सरसों, लोहे से बनी चीजें, चमड़ा, पथर, शराब, तवा चिमटा, अंगीठी, जमीन, चाय पत्ती, काले कम्बल इत्यादि। ऐसा करने से शनि का अशुभ प्रभाव कम हो जाता है।
Shani Dev Vrat Vidhi & Rules: शनि देव का व्रत कैसे रखें? (Complete Guide)
व्रत करने से भी ग्रहों के प्रकोप कम हो जाते हैं क्योंकि जो वार जिस ग्रह से प्रभावित होता है उसी वार का अगर व्रत किया जाए तो उस ग्रह का प्रकोप कम हो जाता है और उस ग्रह का प्रकोप कम हो जाता है। शनि ग्रह का वार शनिवार होता है और शनिवार को अगर आप व्रत करते हैं तो शनि ग्रह का प्रकोप कम हो जाता है और शनिवार को भैरव देवता की पूजा करनी चाहिए।
Shubh Shani Ke Upay: शुभ शनि के लाभ 10x कैसे बढ़ाएं? | Powerful Saturn Remedies
1. शनिवार को पंचधातु की अंगूठी में नीलम नग को सीधे हाथ की मध्यमा उंगली में धारण करने से शनि मजबूत हो जाता है। इसके अलावा लोहे या स्टील का कड़ा या अंगूठी में छल्ला भी धारण कर सकते हैं।
2. घर में नीले रंग के पर्दे, चादर व तकियों का इस्तेमाल व स्वयं काले-नीले कपड़े ज्यादा पहन सकते हैं इससे शनि मजबूत होगा व अच्छा लाभ देगा।
3. 27 शनिवार के दिन काले उड़द की दाल खाने से लाभ प्राप्त होगा।
4. शनिवार को सरसों का तेल लगातार लगाने से या मालिश करने से शनि मजबूत हो जाता है और अच्छा फल देता है।
5. स्टील या लोहे के बर्तनों में खाने से भी शनि मजबूत होकर शुभ फल देता है।
6. अगर जन्मपत्री में शनि बलवान है तो घर में काला कुत्ता, भैंस या काली गाय पाल सकते हैं। इससे लाभ मिलेगा।
7. आंखों में काला सुरमा लगाने से या माथे पर काला तिलक लगाने से लाभ प्राप्त होता है।
How to Fix Bad Saturn: कमजोर या अशुभ शनि को मजबूत कैसे करें? जाने आसान उपाय
शनि आपकी कुण्डली में अशुभ है तो आपको निम्न प्रकार के उपाय करने चाहिए। इन उपायों को करने से शनि ग्रह अपना प्रकोप कम कर देते हैं।
1. 27 शनिवार सात उडद सात काली मिर्ची, 7 काले चने, एक पत्थर का कोयला व एक चमड़े का टुकड़ा, नीले या काले वस्त्र में बांध कर चलते पानी में बहाने से शनि की साढ़े साती व महादशा का प्रकोप कम हो जाता है।
2. स्टील या लोहे की कटोरी में तेल रखकर उसमें अपनी शकल देखने के बाद 5 शनिवार को आक के पौधे पर डालने से शनि का प्रकोप कम हो जाता है। पांचवे शनिवार को तेल वाली कटोरी को आक के नीचे दबा देना चाहिए।
3. सांप के लिए दूध कौवों को 43 दिन तक रोज डालना, काले रंग की गाय, भैंस व कुत्ते की सेवा करना - इससे शनि प्रसन्न होता है।
4. लोहे या स्टील की बांसुरी में चीनी भरकर दूर जंगल में जाकर 7 शनिवार दबाने से घर में होने वाली अशांति ठीक हो जाती है।
5. भगवान शिव भैरव देवता की पूजा करना, अपना चरित्र ठीक रखना, मांस, शराब, तम्बाकू इत्यादि का सेवन न करने से भी शनि प्रसन्न होता है।
इसके अलावा शनि स्नान करने से आपको लाभ मिलेगा। स्नान से पहले शनिवार को तेल की मालिश करें उसके बाद स्नान करें या पानी के अंदर 7 बूंद सरसों के तेल को डालकर नहाने से लाभ प्राप्त होता है।
Shani Yantra Dharan Karne Ki Sahi Vidhi Aur Niyam | Shani Yantra Benefits & Rules
जिन जातकों की कुण्डली में शनि ग्रह का प्रकोप है उनको अपने निवारण के लिए लोहे के पत्र पर शनि यंत्र खुदवा कर उसके बीच में नीलम नग को जडवाकर अपने गले में धारण करना चाहिए। अगर ऐसा करने में आप सक्षम नहीं हैं तो शनि यंत्र को भोजपत्र पर अष्टगंध, केसर, कस्तूरी, कपूर, गौरोचन, सफेद चंदन, लाल चंदन, अगर-तगर तथा कुमकुम से लिखकर लोहे की अंगूठी या ताबीज में डालकर आप अपने हाथ की भुजा में या गले में पहन सकते हैं। इसके पहनने से नजर नहीं लगती, बीमारियाँ भूत प्रेत बाधाएँ जैसे भयंकर कष्ट दूर हो जाते हैं इस यंत्र को शनि के 23,000 मंत्र जापो से शुद्ध अवश्य कर लेना चाहिए, इतनी जापों की संख्या करने ये यंत्र प्राण प्रतिष्ठित हो जाता है, ये मंत्र है:
ॐ शं शनैश्चराय नमः ।
शनि यंत्र
प्रतिकूल शनि भी देने लगेंगे शुभ फल! Shani Dev Ko Prasann Karne Ke Saral Upay
1. शनि को वृद्धावस्था का स्वामी कहा गया है जिस घर में माता-पिता एवं वृद्धों का सम्मान होता है वहाँ शनिदेव बहुत प्रसन्न रहते हैं। जिस घर में वृद्धजनों का अपमान होता है और अन्य कार्यों में धन खर्च होता है वहाँ शनि देव अपने आपको तिरस्कृत महसूस करते हैं। जैसे-जैसे व्यक्ति वृद्ध होता है, उसे भूख कम लगती है। नींद कम आती है वह काम-वामनाओं से विमुख होता चला जाता है उसमें लोककल्याण की भावना जागृत होती है। ये सभी गुण देवताओं के हैं। अतः वृद्धावस्था में व्यक्ति देवत्व को प्राप्त करता है। अतः वृद्धजनों की सेवा से, वृद्धाश्रम की सेवा से शनिदेव विशेष रूप से प्रसन्न रहते हैं। यह व्यवहारिक ज्ञान है। जिसका ध्यान प्रबुद्ध पाठकों को रखना चाहिए।
2. शनि को दरिद्रनारायण भी कहते हैं। दीन-दुःखी संतों और गरीबों की सेवा से शनिदेव विशेष रूप से प्रसन्न होते हैं। शास्त्र नियम के अनुसार व्यक्ति को अपने शुद्ध नफा या आय में से पाँच दस प्रतिशत धन, धर्मार्थ कार्यों में खर्च करने का कट्टटर नियम बना लेना चाहिए।
3. अपने से कमजोर स्थिति वाले व्यक्ति के आगे झुकने से, उनकों विनम्रतापूर्वक प्रणाम करने से शनिदेव प्रसन्न रहते हैं। ऐसे जातक को उनका आशीर्वाद भी मिलता है।
4. असाध्य व्यक्ति को, जरूरततमंद व्यक्ति को काला छाता, चमड़े के जूते-चप्पल भेंट करने से भी शनिदोष शांत होता है।
5. शनि देव को उड़द दाल के लड्डू बहुत पसंद हैं। भीगे हुए या तले चने, गुड़ के लड्डू शनिदेव को भोग लगाकर बाँटें उससे लाभ होता है।
6. शनि कलंक भी लगाता है और साढ़े साती के दौरान तो यह संभावना प्रबल हो जाती है। अतः जातक को किसी स्त्री को पुरुष से या पुरुष को स्त्री से एकांत (अकेले) में वार्तालाप नहीं करना चाहिए। बेमौसम, बेसमय और बेवजह किसी के घर नहीं जाना चाहिए, किसी संदेहास्पद स्थान पर नहीं जाना चाहिए। ऐसे स्थान पर भी नहीं जाना चाहिए जिसके प्रति आसपास का जन साधारण विपरीत विचार रखता हो।
7. शनि पिता के परिवार पिता से बड़े सदस्यों का कारक होता है, जन्मकुण्डली में शनि से दादा की स्थिति का ज्ञान होता है, अतः जातक को चाहिए कि वह ताया दादा या इनके समकक्ष लोगों का सम्मान करें, उनसे आशीर्वाद ग्रहण करें, उन्हें प्रसन्न रखनेक् का प्रयत्न करें इससे शनि के कोप शांत होकर जातक को सुख पहुंचाते हैं। मृतक पूर्वजों का विधिवत् श्राद्ध आदि करना चाहिए।



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